48. समापन
👉 विडिओ संदर्भ देखें: Video 19, time 5:50-24:00
प्रश्न : बाबा जी, आपने संपूर्ण जीवन भर में जो कुछ भी जाना, और जैसा आपने महसूस किया एक आदमी की तरह, और जैसा संपूर्ण मानव जाति के लिए उसको आवश्यक, प्रयोजनशील, कल्याणकारी समझकर आपने प्रस्तुत किया, ये तकनीक की ये महिमा है कि सारे जीवन भर की यात्रा का जो सारभूत है, उसको हम लोगों ने चार दिनों में कैसेट के भीतर भर लिया। आने वाली सदियों में जब आदमी विकट-विकट समस्याओं में, सवालों में, स्थितियों में फसेगा, तो आपके द्वारा बोले हुए ये जो सूत्र हैं, जो दिखनें मे बहुत छोटे से लगते हैं, जिनमें कई बार पढ़ने से, हमको कई बार गागर मे सागर भरे जैसा अनुभव होता है। मानव जाति को किस तरह जैसे बिजली है आकाश में, इस तरह मानव जाति को किस तरह समस्याओं से निकालने में, समस्याओं से उबारने में ये सूत्र, ये आपकी बातें किस तरह से उपयोगी हो जाएंगी, इसको सोच करके मन कभी-कभी अभिभूत हो जाता है।
आपका एक सुखसानिध्य इतने दिनों तक इस गाँव को, इस आश्रम को, इस इलाके के भाइयों और बहनों को प्राप्त हुआ, इसी क्रम मे इस क्षेत्र के जो वैज्ञानिक हैं, चिंतक हैं, शोधकर्ता हैं, वे लोग भी आप से आकर विभिन्न विषयों पर विभिन्न तरह से सवालों की बौछार करते रहे। जैसे युद्ध के क्षेत्र मे चारों तरफ से गोलियां बरसती हैं, ऐसा। मुझको दो चीज़ याद आती हैं, कि जैसे जब आदमी को पता हो सही का तो ये सवालों की बौछार उनको फूलों की तरह लगती है, और अगर सही का पता ना हो, तो सवाल गोलियों की तरह आके जिन्दगी में चुभते हैं। हम लोगों ने एक और सत्य को देखा कि इतने सारे सवाल और इतने सारे फैले हुए विषय, बहुत से विषयों का तो हमारे जैसे सामान्य लोग नाम तक नहीं जानते। anthropology क्या है, विज्ञान की और धारा की उपधारा क्या है। उसमें मेंडल का नियम क्या है, हम लोग तो नाम नहीं सुने। तो ऐसा तो आपके साथ भी हुआ होगा क्योंकि आप भी नहीं सुने हैं।
आपको भी इस तरह विधिवत कॉलेज स्कुल में पढ़ने का मौका नहीं मिला, उसके बावजूद भी जिस तरह इन सवालों की बौछारों के बीच में आप, इनका विधिवत, चाहे engeering का सवाल हो, चाहे genetics का हो, चाहे वो धर्म का हो, तंत्र का हो, शास्त्र का हो, इतिहास का हो, कला, साहित्य, संगीत, पुराण, नक्षत्र विज्ञान, ज्योतिष, स्वास्थ्य शास्त्र, माने जितने सारे शास्त्रों को, हम समझ कर उसमें विशेषयज्ञ होने की आज सोच भी नहीं पाते, आज के दुनिया में, एक विषय को पढ़ते - पढ़ते आदमी थक जाता है, उसमें थोड़ा बहुत काम कर लेता है, उमर खतम हो जाती है। तो इतनी सारी बातों को बिना जाने, एक अस्तित्व दर्शन के आधार पर आपने जैसा उसको पेश किया, आपने जैसा उसको समझा और जिस बारीकी से और जिस गहराई से आपने उत्तरों को इतनी सहजता से जो प्रस्तुत किया है, वो अपने आप में देखने लायक अनोखा विषय था। तो सवालों का उत्तर तो निश्चित हो गया है, उसकी अपनी महिमा और गरिमा तो है ही, लेकिन ये Video recording में हमने आपकी एक-एक मुद्रा को, आपने अगर एक फूल की पंखुड़ी को हिलाया भी है, आपने अगर चेहरे को थोड़ा उपर नीचे किया है, वो सारी चीज़ें कैद हो गई हैं। तो मुद्रा, अंगहार, भंगिमा, इस सब के द्वारा जो सवालों के उत्तर के स्वरूप में निकले हुए जो शब्द हैं, वो आने वाले जमाने के लिए एक बेशकीमती थाती होगी, ऐसा हम लोग सोचते हैं और साथ ही इसकी audio recording, Video recording तो हो ही गई है। इसके साथ जो संदर्भित विषय हैं, वो subject wise