32. प्रबंधन
👉 विडिओ संदर्भ देखें: Video 11, time 44:28-47:43
प्रश्न : बाबाजी ये कला मूल्य का जो मुद्दा है, तकनीकी और कला दोनों के माध्यम से हम उपयोगिता मूल्य पैदा कर रहे हैं।
उत्तर : तो हर उपयोगिता को सुरक्षित करना, number एक, सुविधा जनक बनाना, दो भाग है इसमें।
जैसा सुरक्षित होना और सुविधा जनक होना। उसको handle करने के अर्थ में सुविधा जनक होना, यही सुन्दरता मूल्य है। उसको उपयोग करने में सुविधाजनक हो, वो सुरक्षित भी हो, इसी अर्थ में सुंदरता मूल्य है। अभी हम आपको भी देख लीजिए, हम कपड़ा पहने है, ये हमारा सुरक्षा का अर्थ भी है, सुन्दरता का अर्थ भी है, सुविधा का भी अर्थ है। यही अर्थ सब जगह में बनता है। सुन्दरता ये दो अर्थ में आता है, कला मूल्य की जितनी भी बात आता है, इसी अर्थ में आता है। अभी देखिए इसको जिस ढंग से इसको उपयोग करने की तरीका को सुविधाजनक बनाया है, ये सब सुन्दरता मूल्य के अर्थ में ही आता है, इसमें वो अंतरसुरक्षा निहित है।
प्रबंधन का क्या मतलब है? प्रबंधन का मतलब ये होता है, कोई भी हम व्यवस्था को, हम अच्छी तरह से प्रबोधित कर सके, उसको प्रमाणित कर सके, इन दोनों कार्य जिनके पास है, उसका नाम है प्रबंधन। हम प्रबोधन भी करते हैं और प्रमाणित करते हैं। इसका नाम है प्रबोधन भी और प्रमाणीकरण भी, दोनों मिलने से इसका नाम है प्रबंधन। प्रमाणित करना बहुत ज़रूरी है, प्रबोधित करना भी बहुत ज़रूरी है। हम प्रबोधित नहीं करेगें, प्रबंधन करेंगे, झूठ, महा झूठ। हम प्रबंधन करेगें, प्रबोधित नहीं करेगें ये भी झूठ। हम प्रबोधित करेंगे, प्रबंधन नहीं करेगें ये भी झूठ। प्रमाणित नहीं करेंगे, ये भी महा झूठ। प्रमाणित करेंगे, हम प्रबोधन नहीं करेंगे, ये भी महा झूठ। हम प्रमाणित करने के साथ प्रबोधन रहता ही है। प्रबोधन के साथ प्रमाण रहना आवश्यक है। इस ढंग से प्रबोधन और प्रमाण का संयुक्त रूप का नाम है प्रबंधन।