गांधी के समय में आया Prime minister पर, पार्टी अध्यक्ष पर मुकदमा नहीं चलना चाहिए। वो resolution एक पारित किया, जनता पार्टी आयी उसको cancel कर दिया। ये सब बात आपके सामने गुजरी हुई इतिहास हैं, कथाएं हैं। तो अभी संप्रभुता का मतलब वहाँ रखा है। हम क्या कह रहे हैं? समझदारी को व्यवस्था में प्रमाणित करना संप्रभुता है। सही करना = संप्रभुता। पूर्णता के अर्थ में प्रबुद्धता को प्रयोग करना। पूर्णता क्या है? क्रिया पूर्णता, आचरण पूर्णता के अर्थ में, हम प्रबुद्धता को प्रयोग करना, ये हुआ संप्रभुता।
राज्यनीति में, राज्य क्या होता है? वैभव, मानव का वैभव। मानव का वैभव बताया मानवीयता पूर्ण आचरण, मानवीयता पूर्ण आचरण को सर्व देश काल में उपयोग करना मौलिक अधिकार। यही संप्रभुता का आधार है। ये होता है राज्य का मतलब। सही कार्य व्यवहार करना ही राज्य है। उसमें मूल्य, चरित्र, नैतिकता तीन बताया है, तन, मन, धन रूपी अर्थ को सदुपयोग, सुरक्षा करना ही नैतिकता है। इस ढंग से मानव अपने मौलिक अधिकार पूर्वक संप्रभुता को प्रमाणित कर लेना ही मानव का वैभव है। सही ढ़ंग से इसको उपयोग कर, प्रमाणित कर देना, पहचान दे देना ही संप्रभुता है। हर व्यक्ति इसको आचरण में ला सकता है। संप्रभुता सम्पन्न व्यक्तित्व हो सकता है।
सीमा सुरक्षा बल की जो बात कही गई है, उसका मानसिकता संविधान में ये व्यक्त किया है, देश के पड़ोसी देश होते हैं। पड़ोसी देश कभी भी हमारे ऊपर आक्रमण कर सकते हैं। इसीलिए युद्ध से युद्ध को रोकने की व्यवस्था देना है, राज्य व्यवस्था में, सीमा सुरक्षा के संबंध में निर्णय यही है। और देश में हर व्यक्ति अपराध कर सकता है, गलती कर सकता है, इसीलिए गलती से गलती को रोकना है, अपराध से अपराध को रोकना है, दंड व्यवस्था का मतलब ऐसा लिखा हुआ है। गलती से गलती को रोको, अपराध से अपराध को रोको, युद्ध से युद्ध को रोको, ये शक्ति केन्द्रित शासन संविधान का मकसद यही है।