25. गणित
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प्रश्न: अब गणित पर आते हैं बाबा, इसमें दो-तीन सवाल बनते हैं, पहला तो ये है कि आपने शिक्षा के मानवीयकरण की बहुत गहरी बातें की हैं। गणित एक विषय है, तो गणित विषय का मानवीयकरण क्या संभव है और कैसे होगा? दूसरी बात, गणित जो है जिसको हम लोग संख्याओं का खेल जोड़ना घटाना मानते हैं, पढ़ते भी हैं परंपरा में, उसके उपर आपने विल्कुल एक नया दृष्टिकोण दिया है। ऐसा हम लोगों ने कई बार सुना, किताबों में पढ़ा। उसको स्पष्ट करें कि गणित के बाबत आपका दृष्टिकोण क्या है? आपने विचारधारा दी है, और गणित का मानवीयकरण करके कैसे आप उसको पढ़ाएंगे?
उत्तर : शिक्षा का मानवीयकरण की बात की गई है और गणित का मानवीयकरण के कोई बात, ज़िक्र नहीं किया है। पहले एक तो बात होगा शिक्षा का मानवीयकरण होगा। तो मानवीयकरण का मतलब है समझदार बनाना। तो उसमें से ये बात आता है, जो भाषा आता है, वो कारण गुण गणितात्मक भाषा है। इस तीनों का परस्पर पूरकता विधि से पहचानने की आवश्यकता। तो गणना मर गणित, अभी मानव व्यवहार दर्शन में ये लिखा गया है, गणना को अपन गणित लिखा है, परिभाषा किया है। गणना के बारे में क्या कहा है? जोड़ना घटाना, इतने ही बात किया है। शून्य पूर्व, शून्य पर, इतना ही लिखा है। पहले शून्य लिख करके गणना करना, और बाद में शून्य को लिख करके गणना करना। क्या गणना? जोड़ना घटाना। अभी जितने भी करेगा, जो आदमी जितने भी करेगा न, इससे अधिक कुछ भी नहीं कर सकता। गणित का मतलब इतने ही संभावना है, इससे लंबाई, चौड़ाई कुछ भी नहीं है। कोई भी calculus पढ़ लो, जोड़ना ही है, घटाना ही है।
नाम आप 2000 रख लो, 2000 किताब पढ़ लो! हम आज इसमें ज्योतिषी की सारे गणित विधियों को देखा, वो सबका आर्थिक नहीं, जोड़ना ही है, घटाना ही है। काल विधि से चलो, जोड़ना घटाना है। विस्तार के विधि से चलो, जोड़ना घटाना है। दूरी के विधि से चलो, जोड़ना घटाना है, तोल के विधि से चलो, जोड़ना घटाना है। इसके अलावा दूसरा कुछ कर दोगे, ये कुछ आदमी की बल की रोग नहीं है। ये 700 करोड़ आदमी का बल की रोग नहीं है और कुछ कर दें। ठीक हो गया? ये इसको अपने को समझने की आवश्यकता है, इसमें निश्चयन की आवश्यकता है न, और वृथा भ्रमित होने का कोई मतलब नहीं है। गणित का कोई मानवीयकरण का मतलब नहीं बनता है, शिक्षा का मानवीयकरण का बनता है। गणित को सिखाएंगे कि गणित का अभ्यास जोड़ घटाना ही है, इतने ही है। कितने छोटा सा बात! इतने ही बड़ी बात, जोड़ना घटाना।
प्रश्न : एक तो ये बात कही गई थी कि गणित का मतलब गणना है और उसको अगर देखेंगे तो मूलभूत रूप से जो हम क्रिया कर रहे हैं, उसमें जोड़ने या घटाने की क्रिया ही कर रहे हैं। दूसरी बात जो महत्वपूर्ण है वो है कि गणित वस्तु मूलक है। अभी जो गलती होती है, अभी जो गणित मे हम बहुत जगह जा करके उलझ जाते हैं, उसका कारण ये है कि वस्तु के साथ जो गणित का जुड़ाव है, गणना का जुड़ाव है, उसको जब हम खोल देते है तो बहुत सारे ऐसे मुद्दे आ जाते हे कि हम को लगता है कि उसको जीने मे हम solve नहीं कर सकते। ये कठिनाई है। तो अगर गणित