30. तकनीकी का प्रयोग
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तकनीकी की बारे में बात अपन सोचते हैं, इसी में engineering आता है, उसमें रासायनिक तंत्र भी आता है, भौतिक तंत्र भी आता है और यांत्रकीय तंत्र भी आता है। तो इन्हीं तंत्रों को जो हम समन्वय करते हैं, उत्पादन के लिए एक अनुकूल परिस्थितियों को बनाते हैं, अनुकूल योजना बनाते हैं और इन सभी तकनीकी को नियोजित करके उत्पादन कार्य को संपादित करते हैं। उसी के साथ-साथ एक सड़क हुआ, सेतु हुआ, बड़े-बड़े यंत्र हुआ, इन सब को बनाने के लिए भी हम ये तकनीकी का प्रयोग करते हैं।
तकनीकी किसी विचारधारा का उपज नहीं है। मनुष्य के आवश्यकता का उपज है सभी तकनीकी। सभी तकनीकी हमारा आवश्यकता के आधार पर उपजी हुई तकनीकियाँ हैं। ये विचारधारा के आधार पर नहीं आया है, जैसा भौतिकवाद के आधार पर कोई तकनीकी आई, ऐसा कुछ भी गवाही नहीं है। अध्यात्मवाद के आधार पर कोई तकनीकी आ गई, ऐसा कोई गवाह नहीं है। तो सहअस्तित्व को ध्यान करने पर भी यही निकलता है, सहअस्तित्व के आधार पर कोई तकनीकी निर्धारित होगी, ऐसा नहीं है। सहअस्तित्व के लिए हम तकनीकी को उपयोग करते हैं। एक आवश्यकता के आधार पर तकनीकी आती है। हल जोतने की आवश्यकता आई, हल बनाने की तकनीकी आ गई। गाड़ी की आवश्यकता आ गई, चक्के का आविष्कार हो गई और हमको ऊष्मा की जरूरत पड़ी, आग का आविष्कार हो गई। आग को हम सहअस्तित्ववादी विधि से आग कैसे पैदा करोगे? ये कोई भाषा नहीं है। सहअस्तित्व विधि में हम ईंधन विधि को पहचानेंगे। जो सब ऊष्मा चाहिए वो ईंधन ही कहलाता है। सहअस्तित्ववादी विधि से ईंधन नियोजन को हम पहचानेंगे, उसके बारे में बात हो चुकी है।
ईंधन विधि को तकनीकी है ही है, ईंधन विधि हमको पता ही है। ईंधन क्या है? हम को पता ही है, अभी पहले अपन विचार किए तो कोयला को कोड़ना तकनीकी है, कोयला को जलाना, आग से आग जलता है, ये सिद्धांत है। आग से ईंधन जलता है, ईंधन से आग होता है, दो पद्धति है। या engine में तेल को इतना दबाव में लाते हैं, वो जल जाता है, एक विधि वो है, दबाव वश ईंधन प्रज्वलित हो जाना, एक विधि है, और आग से आग जलना एक विधि है। Petrol engine में आग से आग जल जाता है। और ये ना दबाव से जलता है, इन दोनों को आप हम सब देखे ही हैं, समझे ही हैं। ये तकनीकी को हम सहअस्तित्व विधि से नियोजित करते हैं, वो खनिज तेल को हम उपयोग करेंगे नहीं, उसके जगह में यंत्रो को चलाना होगा तो तैलीय वृक्षों के बीज से हम तेल प्राप्त करेंगे, उस तेल से यंत्रो को चलाएगें। हम यंत्र नहीं चलाएगें ऐसा नहीं है। क्यों ऐसा करोगे? ईंधन अवशेष जो है ना धरती के वातावरण के लिए हानिप्रद हो गई, धरती का वातावरण बिगड़ने के बाद धरती में बुखार आई, इसके दवाई के लिए हम इसको avoid करेंगे।
प्रश्न : जो कोयले को जला कर हम गति पैदा कर रहे हैं इसको तकनीकी कहेंगे कि नहीं?
उत्तर : कहेंगे ना, बरबादी के लिए तकनीकी उपयोग किया, उस तकनीकी को हम आबादी के लिए नियोजित करेंगे, सहअस्तित्ववादी विधि से वोही तकनीकी को सहअस्तित्व को प्रमाणित करने के लिए करेंगे।क्या तकलीफ है इसमें?