34. न्याय, संविधान और संप्रभुता
👉 विडिओ संदर्भ देखें: Video 11, time 1:05:16-1:15:06
न्याय सुरक्षा का मतलब ये है, जो मनुष्य का न्याय की बारे में बताए थी, उभय तृप्ति उसका केन्द्र बिन्दु है। Target क्या है? परस्पर तृप्ति। उसमें कहीं भी dispute आता है, उसको तृप्ति बिन्दु तक पहुँचा देना न्याय की मतलब है। और न्याय को सुरक्षित कर रखना, मतलब उस गाँव में, परिवार में अन्याय होने की कोई संभावना दूर-दूर से भी आने से रोकना। जैसा एक कोई अव्यवस्था से घटित हो जाए, अव्यवस्था से परेशान ना हो, कोई अकस्मात प्राकृतिक परेशानियाँ हो गईं, उससे परेशानी ना हो और इस सभी बातों से बचाते हुए चलने की विधि का नाम है सुरक्षा। और जो उत्पादन कार्य में सुगमता को बनाए रखें सुरक्षा। ये सभी विधा में जो हम गाँव पूरा एक सुरक्षा से घिरी हुई है।
प्रश्न : संविधान?
उत्तर : संविधान का मूल बिन्दु है मानवीयता पूर्ण आचरण। मानवीयता पूर्ण आचरण ही संविधान का मौलिक अधिकार। स्वत्व, स्वतंत्रता, अधिकार का आधार इतना ही है, मानवीयता पूर्ण आचरण। उस आचरण को हर जगह में प्रयोग करने का स्वतंत्रता, यही संविधान है। विनिमय तो समझ में आ गए, शिक्षा समझ में आ गए, तो मानवीयता पूर्ण आचरण को हर जगह में हम आचरित करने की स्वतंत्रता। स्वत्व क्या चीज़ है? मानवीयता पूर्ण आचरण, जागृति, जागृति के आधार पर मानवीयता पूर्ण आचरण। मानवीयता पूर्ण आचरण को हर देश, काल में उपयोग करने की स्वतंत्रता, इस आधार पर हम शुरू करते हैं। ये मानवीय इतिहास शुरू होने का ध्रुव बिन्दु बन सकता है।
प्रश्न : राज्यनीति?
उत्तर : राज्य का मतलब, मनुष्य के पास तीन स्तरीय स्थितियाँ हैं। किस बात की? समझदारी की। एक समझदारी का स्तर को हम नाम दिया है, प्रबुद्धता। समझदारी = प्रबुद्धता। समझदारी को प्रबुद्धता नाम दिया है। प्रबोधन करने योग्य, प्रमाणित करने योग्य अधिकार, प्रबुद्धता। ऐसे प्रबुद्धता का मतलब होता है, समझदारी।
प्रबुद्धता के बाद आता है, संप्रभुता। पूर्णता के अर्थ में हमारा समझदारी को उपयोग करना, अर्थात न्याय समाधान को प्रमाणित करना, समृद्धि को प्रमाणित करना, सहअस्तित्व को प्रमाणित करना, ये क्या चीज़ है? संप्रभुता। अभी हम संप्रभुता को कैसा बताते हैं? सभी जगह में गलती नहीं करना। गलती नहीं करना क्या चीज़, कहाँ से शुरू हुई? भगवान, ईश्वर गलती नहीं करता, राजा गलती नहीं करता, गुरूजी गलती नहीं करते हैं, इन तीन जगह में संप्रभुता को पहचाना गया। ये गणतंत्र प्रणाली आई उस समय में इसके ऊपर चर्चा शुरू हुई, राजा तो मर गए, अब संप्रभुता कहाँ रहेगा? उसके बाद बताया गया, उस समय की report के अनुसार, voter के पास रहेगा। क्या voter क्या गलती नहीं करेगा, इसका guaranty हो सकता है? नहीं हो सकता है। तब क्या होगा? तब संप्रभुता को पहचाना, vote देते समय में voter गलती नहीं करेगा। आज के संप्रभुता यहाँ रखा है। बाकी ये तय नहीं हुआ राष्ट्रपति नहीं गलती करता है, Prime minister गलती नहीं करता है, ये कोई चीज़ तय नहीं हुआ। उसी आधार पर जो इंदिरा