29. समय, काल, वर्तमान
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प्रश्न : समय क्या चीज़ है? समय या काल, एक तो time हुआ जो हम लोग घड़ी से नापते हैं, उसको समय कहते हैं, शास्त्रों में काल को काल भगवान ऐसा भी कहा गया है, वास्तव में समय क्या चीज़ है और उसकी वास्तविकता क्या है?
उत्तर : क्रिया की अवधि बराबर काल, किसी क्रिया कि अवधि को हम काल नाम दिया है। इसमें कोई भी बारह हाथ की दाँत नहीं लगा है, चगुलने के लिए। “कालो जगद्भक्षक:” लिखा हुआ है, ऐसा भक्षण करने वाला कोई साढ़े बारह हाथ की दाँत लगा करके कोई चीज़ बैठा नहीं है, किसी को भी फुरसत नहीं है, सभी को चाब चबा करके मरम्मत करें, किसी को फुरसत नहीं है। काल जो है, किसी क्रिया की अवधि को हम नाम दिया है “काल”। उसमें गणितज्ञों ने बड़ी कमाल किया है! काल तो नित्य वर्तमान है, सही मायने में। यथार्थता में नित्य वर्तमान ही काल है। सच्चाई तो यही है।
मनुष्य अपने जो कालखण्ड को अनुभव करने के लिए, अपना नित्य कर्मों को तय करने के लिए, कालखंडों को पहचानने की आवश्यकता महसूस हुई। दूसरा ज्योतिषियों के लिए कालखण्ड को पहचानने की आवश्यकता निर्मित हुई। ज्योतिषियों के अनुसार क्रिया की अवधि को काल के रूप में पहचाना गया। वो क्या काल है? अर्ध सुर्योदय से अर्ध सुर्योदय तक एक क्रिया, क्या चीज़ क्रिया? धरती की क्रिया। धरती की क्रिया को एक दिन नाम दिया। “उदयात् उदयम् दिनम्” ये लिखा हुआ है, अर्ध सूर्योदय से अर्ध सूर्योदय तक दिन कहते हैं, और कोई जगह में और विधि से दिन कहते हैं किन्तु है वो ही, सब जगह में। एक दिन को हमनें 60 भाग में विभाजित किया, और वो 60 भाग को और 60 भाग किया, और 60 भाग को और 60 भाग कर दिया, ऐसा करते सुक्ष्म-सुक्ष्मतम् कालखण्ड को हम लोगों ने पहचान लिया। वो दिन को हम बनाए रखे थे।
विज्ञान आ गया भाई, वो क्या कर दिया? वर्तमान को काट के, पोल के अलग कर दिया। तो वर्तमान शून्य कर दिया, काल को इतना सुक्ष्मतम् खण्ड किया, वर्तमान कुछ होता ही नहीं बोले। अस्तित्व जो है न वर्तमान में ही है, वर्तमान नित्य है, निरंतर है, अनादि-अनादि काल तक। वर्तमान कभी खत्म नहीं होता। और काल को विखण्डित करते करते करते कहा वर्तमान है ही नहीं, कोई वर्तमान नहीं है, वर्तमान शून्य हो गया, कहना शुरू कर दिया, गणित के अनुसार।
काल को पहचानने की अभीप्सा तो आदमी को रहा ही है। इसका पहचानने की मूल मूद्दा वर्तमान ही है, वर्तमान को ही पहचानना होगा। वर्तना और मात्रा होना, ये दोनों चीज़ का संयुक्त रूप में वर्तमान है। मात्रा सहित होना, इसी का नाम है वर्तमान। वर्तने के मूल में मात्रा होता ही है, माने स्थिति गति, ये वर्तने का मूल वस्तु है। ये हर एक मात्रा के साथ स्थिति गति बनी ही रहती है। चाहे कितने भी परिणाम हों, कितने भी विकास हो, स्थिति गति इकाई की अविभाज्य वर्तमान है। ये कुल मिला करके इसका स्वरूप है, वर्तमान का। निरंतर मात्रा सहित होना। वो कैसे होना? स्थिति गति में होना। कोई ऐसा मात्रा नहीं है जो स्थिति गति के रूप में विद्यमान ना हो।