38. वनस्पतियों में जीवन और प्राण कोशा
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प्रश्न : पेड़-पौधों में जीवन होता है?
उत्तर : ये जो बात थी, महावीर स्वामी ये कहे हैं, कि पेड़-पौधे में जीव होता है, ऐसा कहे हैं, महात्मा के रूप में, जगदीश चन्द्र बोस ने भी बताया पेड़ बात करते हैं। उन्होंने वनस्पतियों का भाषा सुन लिया, आदमी का भाषा तो नहीं सुना ना। बस इतना ही बात है। आदमी का भाषा उनको सुनना नहीं है और झाड़ का भाषा सुन लिया। हमारे यहाँ कथा बनाना बनता नहीं है क्या? ये तो आज की बात है, पहले पत्थर बात किया है ये कथा ही लिखा है, झाड़ बात किया है ये लिखे ही हैं, पक्षी का बात तो हजारों लिखा है, जानवरों का भाषा से आदमी पाठ सीखा है, अब क्या चाहते हो आप बताओ। कुत्ते से, बिल्ली से, बंदर से, क्या है वो, शृगाल को क्या कहते हो? सीयार से, सबसे जानवरों में शियार को बड़े चालाक माने गये हैं। कथाओं मे ऐसा कहे हैं भाई। बहुत जानवरों से आदमी बुद्धि सिखा है, ऐसा कहत हैं। तो इस प्रकार की परंपरा को क्या करोगे? वो उसी प्रजाति के एक आदमी है क्या नाम बताया? वो बतातै है, वो झाड़ बात करता है।
झाड़ बात कर दिया ठीक है, तुम्हारा बच्चों से क्या बात किया आपने, वो तो लिखा नहीं, झाड़ का बात सीख लिया। ठीक हो गया, तो इस ढंग की बात है। तो हमने जो देखा है, ये जितने भी वनस्पती संसार हैं ये शरीर हैं, आपके शरीर, मेरा शरीर, गधे की, घोड़े की, कुत्ते की, बिल्ली की और झाड़ पौधे की, ये जितने रचनायें हैं, इन सब में प्राणकोशा नाम की एक चीज़ है। प्राणकोशा का मतलब ये होता है, साँस लेने वाली सूक्ष्मतम जो कीट हो सकता है, उसका नाम है, प्राणकोशा। प्राणकोशाओं में ये बहुत बड़ी भारी एक गुण देखा गया, हर प्राणकोशा में प्राणसूत्र नाम की चीज़ होती है, वही है कुल मिलाकर के, साँस छोड़ना, साँस लेने वाला और वो साँस छोड़ने साँस लेने का क्रिया के करण से उसको प्राणकोशा हम नाम दिया। अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं हम नहीं जानते।
(शेल होता है बाबाजी जिसका अर्थ है कवच। और सेल जिसका अर्थ प्राण कोशा से ही है। जीवित भी कहते है और डेड भी कहते हैं लेकिन आप जो कह रहे हैं की हर प्राण कोष में प्राण सूत्र होता है, ऐसा नहीं कहते विज्ञान में।
बाबाजी: अस्तित्व में जो एक सच्चाईयाँ हैं, सच्चाई से जुड़ी हुई भाव, किसी भाषा में भी मनुष्य से मनुष्य को यदि पहुँचता है, वो शुभ के अलावा दूसरा कुछ होता नहीं, ठीक है। यहाँ तक अपने को ठीक लगता है, अभी अपन ये सोचने की मुद्दा है, ये जो प्राणकोशा है, प्राणकोशा से रचित शरीर को जीव कैसा कह लिया? इसी आधार पर हम आपसे कहता रहा। life cell तो नहीं कह रहे हैं?
प्रश्न : नहीं बाबा, इस आधार पर कहते हैं, कि पेड़ पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं और जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते हैं, यही उन में मुख्य अंतर दिखता है, बाकी सारा चीज़ करीब-करीब एक जैसे हैं।