18. परमाणु में गति
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प्रश्न : बाबा जी आपने कहा कि परमाणु अंशों में घूर्णन गति और वर्तुलात्मक गति, परमाणु में कम्पनात्मक गति और वर्तुलात्मक गति हैं। मध्यांश के अंशों में घूर्णन गति के होने से ही मध्यस्थ बल का प्रकाशन है, समझाइए।
उत्तर : जैसा स्थूल रूप में ये धरती है। अति सूक्ष्म रूप में परमाणु अंश, परमाणु अंश जब अपने गति पथ में घूमता रहता है, वो अपने में घूर्णन करता भी रहता है और आगे सरकता भी रहता है। सरकने का गति जो है जब तक ज्यादा रहता है, तब तक वो इसी विधि में चलता रहता है,किस विधि से भौतिक रासायनिक परमाणुओं के कक्ष में ही वो अपने कार्य को प्रकाशित करता रहता है। ये जो परमाणु अंशों का जो गति पथ रहता है, इन गति पथ सहित ही परमाणु कहलाता है। परमाणु में कम्पनात्मक गति की अभिव्यक्ति है, माने जितना गति पथ है वो सभी मिलकरके जो क्रिया कलाप है, उसके फलसूत्र में कम्पनात्मक गति रहती है। तो क्या बचा खुचा रहा उसका अर्थ है गतिपथ में जो चलता हुआ, माने दौड़ता हुआ जो अंश होते हैं, उनकी जो है विन्यास है ना जितना dancing होता है, नृत्यकार्य होता जाता है, उतना ही कम्पनात्मक गति बढ़ता जाता है। किसमें? परमाणु में। एक प्रकार से नर्तन क्रिया ही ये कम्पनात्मक गति का अभिव्यक्ति है। घूर्णन गति में जो नर्तन होती है, वो ही कम्पनात्मक गति के अर्थ को प्रकाशित करता है।
इस ढंग से देखा गया। जो है ना जितना कम अंश कम परिवेश उतना कम कंपन, जितना ज्यादा परिवेश और अंश उसके अनुसार ज्यादा कंपन।कंपनात्मक गति को परमाणुओं में देखा जाता है। तो इन आधारों को यदि हम पकड़ते हैं, तो ये पता लगता है,व्यवस्था करने में अंशों का खुशहाली को अनुभव किया जा सकता है।अंशों का भागीदारी में अंशों का खुशहाली ही उसका नर्तन है, ऐसा मेरा सोचना है।इस विधि से क्या हो जाती है ये खुशहाली की अभिव्यक्ति है, पूरा अभिव्यक्तियाँ, मातम बनाने की अभिव्यक्ति नहीं हैं अस्तित्व में, शोक मनाने की कोई अभिव्यक्ति अस्तित्व में नहीं है। तो ये शोक कहाँ से आ जाता है? मनुष्य ही अपने शोक को अस्तित्व में भी आरोपित करता है, जैसा अभी तक करते आया। सुख, दुख से छूटने के लिए तो सारा कुकर्म किया है धरती के साथ और काय के लिए किया है? ऐसा इसका माने समीक्षा बनती है।इस बीच में यदि शुभ के अर्थ में घटित हो गई वो बात का भी अपन गणना किए हैं।आगे चल करके यही आवश्यकता है,ये सभी परमाणुऐं जिसको हम पहचान चुके हैं या अकस्मात् आगे चल करके पहचान में आएगा, इन सभी से बनी हुई वस्तुओं को, हम सदुपयोग करने की अर्थ में अपने मानसिकता को संजोने की आवश्यकता है।
प्रश्न : बाबाजी एक प्रश्न था कि मध्यांश के अंशों में घूर्णन गति के कारण मध्यस्थ बल कैसे पैदा होता है?
उत्तर : कैसे पैदा होता है? कैसा पैदा होने की बात नहीं है, मध्यस्थ बल है।ये क्या इसका मतलब।
प्रश्न : ये खुशहाली को explain करने की जो बात है, ये चैतन्य परमाणु के लिए लेते है तो ठीक लगता है। चैतन्य परमाणु की बात जब हम कह रहे हैं। खुशहाली और शोक दोनों की बात उसमें समझ में आता है, चैतन्य परमाणु रोमांचित करता है लेकिन इसको पार्थिव परमाणुओं में कैसे कहा जाए?