16. परमाणु - 3 (मध्यस्थ बल व प्रजाति)
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परमाणु व्यवस्था में, जिस-जिस प्रकार का कार्य विन्यास करना है, वो परमाणु में निहित है, पहले इस सिद्धांत को समझो। एक तो बात समझो कि परमाणु ऊर्जा सम्पन्न है, आपके अनुसार कुछ नहीं है। एक तो झंझट पट जाती है ये हमारे अनुसार।
प्रश्न : नहीं बाबा ऐसा नहीं है। विज्ञान में भी जो प्रतिपादन करते हैं, उसको ठीक से अध्ययन करें तो ऊर्जा सम्पन्नता से ही बात शुरू करते हैं, जैसा electrons हैं, हमेशा अपना orbit में ही घूम रहे हैं, spin movement भी है उसमें, ये सब ऊर्जा सम्पन्नता के आधार पर ही है।
बाबा जो मूल अंतर हो जाता है, सत्ता में भीगे होने के कारण हर अंश क्रियाशील है, उसके कारण घूम रहा है मध्यस्थ दर्शन के अनुसार। विज्ञान के अनुसार एक positive charge है, एक negative charge है।
उत्तर : इन दोनों के खींचातानी से होता है।
प्रश्न : electron अपने आप में जो घूम रहा है, उसका spin orbit है। उसको positive charge से कोई लेना-देना नहीं है। उसको अपने आप में प्रतिपादित करना पड़ेगा। वो अपने आप में घूम रहा है। एक पूरा परिवेश में घूम रहा है। अपने आप में जो घूम रहा है, उसको कोई भी लेना-देना positive charge से नहीं है। तो उसकी ऊर्जा सम्पन्नता तो है ही?
उत्तर : अभी जो अपन कह रहे हैं, ऊर्जा सम्पन्नता उसके साथ बता रहे हो कि originally बता रहे हो, ऊर्जा को क्या मानते हैं वो? वो बात आती है ना?
प्रश्न : energy कहते हैं जिसको वो?
उत्तर : क्या चीज़ है energy? क्रियाशीलता से ही energy है, उनका आशय है वो। क्रियाशीलता कहाँ से आ गई?
प्रश्न : क्रियाशीलता से energy है, उनका आशय वहाँ है।
उत्तर : क्रियाशीलता कहाँ से आ गई? कहाँ से आ गया भले ही ना करे वोही बात है, पहले कोई एक धक्का दे दिया, इसीलिए एक शुरू हुआ, दूसरा शुरू हुआ - ये सब कहाँ चला गया? और उसके बाद खींचातानी करते रहे ये - सब कहाँ चला गया? उसके बाद कोई चीज़ आ गई? खींचातानी, धक्का-मुक्की से छूट के क्या कोई और चीज़ आ गई मूल क्रिया के लिए? पहले ये बताए हैं, ये हम सुने हैं क्रिया के लिए एक परमाणु दूसरा परमाणु को धक्का दे दिया। वो पहला परमाणु धक्का देना कैसा बन गया पूछा तो उसको चुप हो गए - पहली बात। उसके बाद खींचातानी से होता है