47. अध्ययन के तीन चरण
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प्रश्न : अध्ययन के 3 चरण को स्पष्ट कीजिए?
उत्तर : अध्ययन जो हमने किया है, जैसा हम अस्तित्व में अध्ययन किया। पहले दृष्य को देखा, दृष्य में वस्तु होता ही है। व्यापक भी एक दृष्य ही है, एक-एक भी दृष्य ही है, पहला ये समझ में आया। मैं दर्शक हूँ, मैं ये दोनों को देख रहा हूँ, इसको मैंने पहचाना। ये बात शायद हर विद्यार्थी के लिए जरूरत है। एक बात यहाँ पट गई। दूसरा बात आयी - जब जीवन को देखा, जीवन क्रिया कलाप को देखा, जीवन का स्वरूप को देखा, जीवन का लक्ष्य को देखा, जीवन शक्ति, बल को देखा, ये जीवन ज्ञान यही है। ये पता चला, और इसका ज्ञाता जीवन ही है, मैं ही हूँ ज्ञाता, ये आया। अस्तित्व के साथ द्रष्टा, जीवन के साथ ज्ञाता। ज्ञेय के बारे में आगे, तो पूरा सह अस्तित्व ही ज्ञेय है। उसी के साथ में मानवीयता पूर्ण आचरण, एक त्व सहित व्यवस्था के रूप में हर एक में है, ये बात निकल के आई। सम्पूर्ण व्यवस्था है ये, व्यवस्था में भागीदारी है। मानव को व्यवस्था और व्यवस्था में भागीदारी होने के लिए ज्ञान भी चाहिए, दर्शन भी चाहिए, आचरण भी चाहिए। ये बात आई। इस ढंग से हमने पढ़ा। ये पढ़ाई मैं समझता हूँ, अभी आगे पीढ़ी को भी यही पढ़ाई चाहिए।
एक step तो ये हो गयी। तो पहले step मे विद्यार्थी को ये ज्ञान देना जरूरी है। तुम समझने योग्य व्यक्ति हो, समझने योग्य विद्यार्थी हो, तुम समझ सकते हो, ये भरोसा दिलाना अध्यापक का पहला काम। अध्ययन कार्य का पहला step ये होगा। उसके बाद कोई ना कोई भाषा विधि होगी। चाहे इंग्लिश में पढ़ाओं, हिंदी में पढ़ाओं, उसमे पढ़ाओं, इसमे पढ़ाओं और कोई ना कोई भाषा में तो आप पढ़ाओगे ही। भाषा एक भाग है, किसके लिए? अध्ययन कार्य के लिए। भाषा में अभी तक अपन सोचते रहे, व्याकरण भाषा को नियंत्रित कर सकता है, करता है। अभी तक की अवधारणा यही है। और संस्कृत भी वैसे ही मानता है, तो हमारे अनुसार इसको बदल दिया। वस्तु बोध होना ही भाषा का नियंत्रण है, सार्थक है। बोलिए साहब, pulse कहाँ से बदल गया। वस्तु बोध यदि नहीं होता है, व्याकरण को तुम कुछ भी लगाते रहो, क्या हो जाता है भाई।
प्रश्न : शब्द की हेराफेरी होती रहेगी, वस्तु तो पकड़ में आयी नहीं।
उत्तर : ये बात। “नहि नहि रक्षति डुकृड्करणे” शंकराचार्य जी भी इस बात को गाके गया, तुम व्याकरण की छंद कुछ भी नहीं काम करेगा , ज्ञान ही करेगा बोल के गए वो, ज्ञान के बारे में अभी अध्यात्म ज्ञान को बताया, अध्यात्म को बताया व्यवहार से कोई लेन-देन नहीं हैं। ऐसा बात सब हो गई। ये बात पूरा हो गया न। यहाँ हम पहुँच गए। तीसरा step वस्तु बोध। तो शब्द के बाद वस्तु बोध यदि होता है, शब्द का अर्थ वस्तु है, वस्तु बोध हो जाता है, तब हमारा अध्ययन हुआ। यदि वस्तु बोध नहीं हुआ है, तो शब्द तक हम रह जाएंगे। शब्द तक भी हम तब तक पहुँच नहीं पायेंगे, जब तक हम समझ सकता हूँ, हम प्रमाणित हो सकता हूँ, आदमी ही एक मात्र वस्तु है, जो समझ सकता है,