28. विवेक
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प्रश्न : विवेक क्या है? आदमी के जिंदगी के साथ उसका क्या संबंध है? अभी बहुत सारी बातों के ऊपर जो चर्चा हुई, विवेक के द्वारा इन सब पर क्या रोशनी पड़ती है, या कैसे हम उसको समाधान के क्रम में प्रयोजित कर सकते हैं?
उत्तर : विवेक का मतलब होता है, लक्ष्य को पहचानना। अस्तित्व का लक्ष्य क्या है? सहअस्तित्व। सहअस्तित्व ही अस्तित्व का लक्ष्य है।उस को छोड़ करके आप क्या भागोगे मैं क्या भागूँगा, कहाँ भागूँगा? हर जगह में सहअस्तित्व मूल लक्ष्य है। वो मूल लक्ष्य के आधार पर हम राज्य के बारे में क्या कहेंगे? माने अर्थ व्यवस्था के बारे में क्या कहेंगे? समाज के बारे में क्या कहेंगे? ये सब करने से समाधानात्मक भौतिकवाद आता है। सहअस्तित्व को मूल में रखा, सहअस्तित्व को शीर्ष में रखा, ये लक्ष्य है। समाज का लक्ष्य क्या है? सहअस्तित्व है। सहअस्तित्व विधि से समाज को व्याख्या किया तो अपने आप से ठीक लगता है, आपको भी स्वीकार होता है, हमको भी होता है, गाँव वाले को भी होता है, शहर वाले को भी होता है।
जो सोचते हैं जिनके पास बहुत सारा पैसा है मानते हैं, उनको भी ठीक लगता है, जिनके पास नहीं है उनको भी ठीक लगता है, जो शोषण करते हैं, उनको भी ठीक लगता है, जो शोषण नहीं करते हैं दान करते हैं, उनको भी ठीक लगता है। ये नहीं होता, तब वो संघर्ष ही ठीक लगता था, आदमी कैसा आदमी कहोगे, घोडा-गधा कहोगे, क्या कहोगे इसको, आप ही बताओ? उसके पहले संघर्ष करना ही ठीक लगता रहा, 70 का भारत उसको उचक-उचक के गावत रहा, हमारे सामने! हम संघर्ष का राह अपनाएँ हैं! हम पूछे संघर्ष करके क्या करोगे? तो बोले 2-4 प्रतिशत आदमी हैं, उनको घाट उतार दिया तो सब सही हो जाएगा। इस प्रकार की आदमी जात है, इसको क्या करोगे भाई? संघर्ष नाम की जो भाषा है, ये हमारा भ्रम का उपज है। भ्रम में हम कहीं भी तालमेल बैठा नहीं पाते थे, झगड़ा करो भाई।
जैसा अभी भी उत्तर प्रदेश में कई ऐसा परिवार है, chain reaction वाले, तो कोई एक आदमी एक आदमी को गोली से मार देता है, मार दिया, वो तो चले गये यात्रा, और जो मर गया है उनके बच्चे के लिए दो भैंसी खरीदते हैं। एक भैंसी अभी दुहो, इनको पिलाओं। बच्चे का जब आयु आया, तो उनको दंड पेलो, ताकत बनाओ, ताकत बना करके मस्त मुस्टंड बनाया, बन्दूक लाके दे दिये, उसको मार के आओ। मार के चले आया, खतम हो गया। अब उनके बच्चे अब भैंस खरीदना शुरू किया, दूध पीना शुरू किया। ये chain reaction हम समझता हूँ, हजारों परिवारों में आपको मिलेगी, एक नहीं है, हजारों परिवारों में ये चित्र मिलेगी, आज भी चल ही रहा है।
वोही चैन chain reaction कौमी भावना में, कौमी विधि से, तो एक कौम जो है ना अभी डंडा खा करके अभी तो चुप हो गया, तो अपने को सोचा कि नहीं भई, दूध पीया करो, हड्डी चाबा करो, मुशतंडे बन जाओ और बंदूक चलाओ, जाओ चलो वो सारे कौमिओं को सब मार के आओं। अभी तो पेपरों में तो आप सुन ही रहे हो, जिहाद