करते हुए, गणना करते हुए, उसमें जो वस्तु की बात की जा रही है, उस वस्तु को साथ-साथ हम बनाये रखे, वस्तु के सापेक्ष मे हम गणना की बात करें, तो ये कठिनाई नहीं है। ये वस्तु मूलक गणित की बात हुई, जैसे मैं एक उदाहरण देता हूँ अभी एक irrational number का concept है। जैसे √2 जो irrational number है अपरिमेय संख्या। वो ये कहते हैं कि आप ठीक-ठीक इसको बता नहीं सकते ये कितना होगा। अब इसको हम define करने जाते हैं तो एक इकाई का वर्ग अगर लेंगे, उसके कर्ण की लंबाई जो होती है वो √2 होती है। एक वर्ग देखे तो जिसकी चार भुज 1,1 cms की है। उसके दो corner को मिला देंगे तो उसकी लंबाई √2 के बराबर होते है। इसको यदि हम संख्या में लिखना चाहे तो नहीं लिख पाते हैं। लेकिन उस लंबाई को बताना चाहें तो ठीक ठीक बता सकते हैं। उसको धागे से नाप लेकर बता सकते हैं कि ये √2 है। irrational तो इसमें कुछ भी नहीं है, ये तो बिलकुल rational है। उसको आप अपनी बनाई हुई संख्या विधि में नहीं ले सकते हैं, लेकिन वस्तु रूप में तो है ही।
उत्तर : संख्या को लेकर के हम उलझते हैं। माने 1-9 तक की जो संख्या बनी हुई है, इसको ले करके हम उलझ जाते हैं। वस्तु को भूल करके शुरू करते हैं तो एक से एक दिगगज हैं - चार ही नहीं होता हे, 2और 2 साढ़े तीन भी होता है। अब क्या करोगे तुम? सर कूटोगे की पैर पकड़ोगे की dance करोगे? क्या करोगे? वस्तु को छोड़ करके चला, माने ये जितनी गफ़लत बाजी है वो सभी गणित बताता है। कैसे बताता है? वस्तु को छोड़ने की बाद। वस्तु के साथ गणित चलता है तो बिल्कुल कुत्ते जैसा चलता है वो। जैसे कुत्ता अपने दाना पानी देने वाले के पीछे दौड़ता है ना, वैसे संख्या दौड़ता है।
प्रश्न : 1-1=0 हो जाता है गणित में, पर एक वस्तु में एक वस्तु घटती नहीं है?
उत्तर : एक व्यक्ति को एक व्यक्ति से घटाओ शून्य हो जाए, ये हो पाता है ? ये कितना शुद्ध झूठ है आप सोच लो। शुद्ध झूठ!
प्रश्न : इसलिए गणित से जो भाव जाता है वर्तमान में, कुछ और ही जाता है वर्तमान में। उसी की मानवीयकरण की बात कर रहे थे महराजजी।
उत्तर : ये क्या है ये? कुल मिलाकर के ये देश और काल से संबंधित बात है। भाई यहाँ दो व्यक्ति थे, यहाँ से दोनों व्यक्ति चले गए। दो में से एक व्यक्ति चले गए, उसमें कौन सा संख्या काटने आयेगा आपको? नहीं काटने आयेगा। नहीं नहीं, एक ऋण, एक आदमी बराबर शून्य आदमी, वो होता नहीं है। आप समझ गए सफ़ेद झूठ कैसा समाई हुई है? ऐसा बनता है। ऐसे बहुत सारे नजीरे आएंगे अपने सम्मुख। इसलिए वस्तु मूलक विधि से गणित, अपने आप से ये जो नौ संख्या हम उच्चारण करते हैं, ये पाला हुआ कुत्ते जैसा दौड़ता है। जब वस्तु को छोड़ दिया, पागल कुत्ते जैसा काटने दौड़ता है! कैसा दौड़ता है? वो भी कुत्ता ही है। पागल कुत्ते जैसा काटे दौड़ता है। आदमी को दौड़ाता है फिर।
वस्तु ही वास्तविकता को व्यक्त करता है, ये बात हो चुकी है आप हमारे समझ में। संख्या वास्तविकता को बताता नहीं है। वस्तु को गणना करने के लिए संख्या एक दो तीन लगाये हैं। वस्तु को छोड़ने के बाद पागल कुत्ता जैसा काटता है। कैसा काटता है आदमी को? पागल कुत्ता जैसा दौड़ाता है, वैसा संख्या आदमी को दौड़ाता है फिर।