किया है? परिणाम क्या निकला है। ठीक है ना। इसी में राज्य भी आता है, संस्कृति भी आता है, अलंकार भी आता है, कला भी आता है, सब कुछ आता है। इस ढंग से इतिहास को हम, विगत में बीती हुई बात को समझना बराबर इतिहास होता है।
अभी इतिहास में यही सर्वाधिक पढ़ाया जाता है, उसको ये काटा, इसको ये पौला, ठीक है। क्या है वो, क्या तो? आल्हा! आल्हा गात हीं भाई, आल्हा! ठीक है ना। गा-गा करके डमरू बजात हीं, ढपला बजात हीं, आल्हा गात हीं! ठीक है ना। तो इसको इतिहास मानी जाती है। क्या है भाई ये सब में, कुल मिला करके, कथा सुनेगा तो, वो उनके एक औरत को अपहरण किया, उठा के ले गया, सेना गया ऐसा पौलिश-ऐसा पौलिश, कि चटनी जैसा पौलिश कहिस है। अब बताओ भला का कीन जाए, कहाँ जा करके डूबें, क्या सीखें, क्या पढ़ें? ठीक है ना। आप ही बताओ सहीं, मार-काटने में क्या सीखें? हम मार काटना सीखना है? तो, तब तो पढ़ाया जाए। यदि मार-काटना सीखना नहीं है, इसका क्या अर्थ है आप ही बता दीजिए। ठीक है। सीधी बात ऐसा दावा बनता है।
तो इसीलिए हमारा सोचना के अनुसार ऐसा है, अभी तक मानव इतिहास शुरू हुआ नहीं है। सम्मानजनक भाषा हम यदि प्रयोग करूँ, हम ऐसा प्रयोग करेंगे। मानव इतिहास तो शुरू नहीं हुआ है। अमानवीय इतिहास को मानव इतिहास यदि कहना चाहते हैं तो हमको कोई तकलीफ नहीं है, एक नरियल हमारे तरफ से प्रस्तुत। नरियल चढ़ा दूंगा हम। अब क्या करेंगे, सम्मान करेंगे। ये बात जो है, अभी तक मानवीय इतिहास तो इस धरती पर शुरू नहीं हुई। ये तो बात सही है। अब राक्षस मानव, पशु मानव का इतिहास पढ़ करके मानव तो कोई होने वाला नहीं है। ठीक है?
तो ये तो बात हर जगह में ये कथाएं लिखी हुई हैं, देवासुर संग्राम तो शुरुआत ही से है। ठीक है? लिखा है कि नहीं? (लिखा है बाबा) वैदिक ऋचाओं में भी देवासुर संग्राम की बहुत अच्छे-अच्छे बढ़िया-बढ़िया लिखा हुआ है। कितना बखूबी से संग्राम हुआ, कौन किसको किस तरीके से काटा। बहुत बढ़ियाँ तरीके बताए हैं, काटने का। ठीक है। तो इन बातों से अपने को कुछ मिलने वाला नहीं है। मानव इतिहास के लिए कोई presentation इधर से मिलता नहीं है। यही मिलता है, शरीर परंपरा को बनाए रखा, धन्यवाद नंबर एक। ठीक है। अध्यात्मवाद, देवी-देवता येन तीन कुछ शब्दों को हमको सिखाया है, उसके लिए धन्यवाद। ठीक है। और व्यापक वस्तु कोई चीज होता है ऐसा एक हमको सूचना दिया है, उसके लिए धन्यवाद। हम जो ना शुक्रगुजार हैं ही हैं, कृतज्ञ हैं ही हैं। ठीक है। नंबर 3, सबसे अच्छी बात ये है शुभ चाहते रहे, उसके लिए हम कृतज्ञ हैं। यही लिखा है महराज जी।
प्रश्न : तो आप के लिहाज से बाबा, मानव का इतिहास तो लिखा नहीं गया। अमानवीयता की घटनाओ का जोड़-तोड़ है, तो इतिहास विषय को पढ़ाना बंद कर देना चाहिए, उसका कोई प्रयोजन नहीं है?
उत्तर : ऐसा कुछ भी नहीं। इतिहास में यही हम लिखेंगे जंगल युग में, माने आदमी का इतिहास बताएंगे, कैसा संघर्ष किया, कैसा अपने को बना के होते हुए आया, परंपरा को बना के आया। ठीक है। उसके बाद पत्थर के युग में, धातु युग में, कबीला युग में, ग्राम युग में, कैसा अपने को बना के आया। और उसके बाद जो है ना राजयुग में कैसा अपने को समर्पित किया। ठीक है। राजयुग आने पर क्या आश्वासन मिला, ईश्वर युग आने से क्या गुरुकुल, माने ऋषिकुल, गुरुकुल आने से क्या आश्वासन मिला, ये आश्वासन कितना सार्थक हुआ, असार्थक हुआ, इसको हम पढ़ाएंगे।