(ये औसत फिर क्या है भैया 66.69 या ऐसे ही एक हुआ 57.2 ये वास्तविक नहीं है?) वस्तु क्या है, आप बताइये ना भई, आप ही बताइये? (मतलब साढ़े तीन आदमिंयों ने vote दिया) हाँ जी, लीजिए साब, ये हो सकता है? (हाँ गणित में होता है लेकिन यथार्थ में तो ऐसा हो, ऐसा अनुभव नहीं है।) होता है क्या पूछा, आपके मती से? (नहीं, नहीं होता है) नहीं होता है, ख़तम हो गयी बात, इतने अच्छे हैं गणित! (लेकिन अगर हमको वास्तविकता की पकड़ है, तो ये हमको पता लगता है कि अगर 400 आदमी थे तो उसमे 14 आदमियों ने vote दिया होगा, ये हमको समझ आता है) यही वस्तु मूलक है। तो वस्तु को छोड़ दो, है ना, 4.5% voting हुआ। इसमें जो है ना पोने चार, पोने बारह आदमी कौन सा होता है आप ही बताओ! बताये ना वस्तु को छोड़ने की बाद वो संख्या पागल कुत्ता जैसा आदमी को दौड़ाता है, वो ही संख्या आदमी को दौड़ाएगा। उसके पहले आदमी के पीछे पाला हुआ कुत्ता जैसा संख्याएँ आते रहे। यही इसका उदाहरण बन सकता है। ठीक है ये?
इतिहास
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प्रश्न : अब इतिहास के ऊपर आते हैं बाबा, पहला सवाल तो ये है, कि अभी तक जो इतिहास लिखा गया है, जिसको हम लोग पढ़े हैं, वो आपको कैसा दिखता है, दूसरा क्या वाकई उस इतिहास से मनुष्य को कुछ सबक लेने लायक कोई सारभूत बात वहाँ से निकलती है, और तीसरा अगर आपकी सहमति इतिहास की उस तरीके से नहीं है, जो इतिहास के नाम पे हम को पढ़ाया जाता है, जो लिखा है किताबों में, तो वास्तव में इतिहास क्या होना चाहिए?
उत्तर: बढ़ियाँ कहा जी आपने, देखिए मानव परंपरा का समीक्षा जो होती है, अभी तक की मानव परंपरा कैसा गुजरा, उसको हम स्मरण करने के लिए, विधियों को जो apply करते हैं, उसको हम इतिहास कहते हैं। ठीक है?
ये मूल में इतिहास ऐसा बात को इतिहास कहना, नामकरण करना ये स्वाभाविक है, जो बीत चुकी है उसको स्मरण में लाने के क्रिया को हम इतिहास कहते हैं। ठीक है ना भाई? अच्छा, ये सब को समझ में आता है। उस इतिहास में कुछ प्रमुख आयाम हैं, या बहुत सारे आयाम हैं। जैसा आर्थिक विधा को हजार वर्ष पहले कैसा समझा। माने हजार वर्ष पहले भी कोई आदमी संपन्न होने के लिए प्रयत्न किया होगा। एक हजार वर्ष पहले राज्य को, माने सुदृढ़ राज्य को कैसा समझा। हजार वर्ष पहले संविधान को सुदृढ़ संविधान को, न्यायिक संविधान को क्या समझा। ठीक है। तो एक हजार वर्ष पहले अलंकार को आदमी कैसा करता रहा। एक हजार वर्ष पहले कैसा आदमी गाता रहा, नाचता रहा, बोलता रहा। ये सब बातें इतिहास की कड़ियाँ हैं। माने ये सब एक-एक भाग है।
वो जो मूल मुद्दे में जो हमारे गणना में जो आता है, एक हजार वर्ष पहले, दो हजार वर्ष पहले, दस हजार वर्ष पहले, करोड़ वर्ष पहले आदमी अपने समझदारी को क्या मानता रहा है नंबर एक, उस समझदारी को आर्थिक पहल में कैसा प्रयोग किया, ठीक है ना, और संबंधों की पहल में, मानव के व्यवहार पहल में कैसा प्रयोग किया, मनुष्य में जंगल के साथ कैसा प्रयोग किया, मनुष्य ने धरती के साथ कैसा अपना शक्तियों को प्रयोग किया। क्या बना इतिहास?