बोला - ये उसको खीचंता है, ये इसको खींचता है इसीलिए सब गतिशील हैं - ऐसा वो कह रहे हैं बताते हैं। ये क्या चीज़ सही है? या इसके इलावा और कोई चीज़ बताते हैं?
प्रश्न : पूरी consistency maintain नहीं हो पाती। बहुत सारे सिद्धांत वो बहुत टुकड़े-टुकड़े में दिखाई पड़ते हैं। उसको अगर आप logically प्रश्न पूछने जाएंगे कि इसका स्त्रोत क्या है, तो वहाँ जा के वो चुप हो जाते हैं।
उत्तर : कुल मिला करके यही बात बनता है, सत्ता में सम्पृक्त रहने वाला concept नहीं आया है। बात इतने ही है ना?
प्रश्न : सत्ता में सम्पृक्त रहने वाला और उसके आधार पर सहअस्तित्व के रूप में होने का जो सिद्धांत है, जैसे अंशों को हम सहअस्तित्व के रूप में है, ऐसा कह कर बात को explain करते हैं। अंश सहअस्तित्व मे है, ये एक मूलभूत प्रतिपादन से शुरू करते हैं। उनके लिए उसको explain करना है, अंश क्यों परस्परता में हैं? उसको explain करने गये, तो बताया विपरीत आवेश में हैं, विपरीत आवेश परस्पर आकर्षण करते हैं। विपरीत आवेश परस्परता में क्यों आकर्षीत करते हैं, तो जवाब नहीं मिलता,और आवेश भी क्यूँ है यह भी जवाब नहीं मिला।
उत्तर : इसमे ये सुविधा हो गई, सहअस्तित्व विधि से, परमाणु में हर अंश व्यवस्था में भागीदारी करने का प्रवृत्तिशील है ही है, इसीलिए जहाँ उसको स्थान मिलता है, उस जगह की काम कर लेता है। मध्य में काम करने के लिए स्थान होता है, मध्य में काम कर लेता है, परिवेश में यदि स्थान होता है, उसमें काम कर लेता है, उसमें अपना आचरण को प्रस्तुत कर देता है। ऐसा ये बनता है। प्रत्येक अंश सत्ता में सम्पृक्त होने के आधार पर ये सब चीज़ आती हैं।
प्रश्न : मध्यस्थ बल का स्त्रोत के बारे में थोड़ा बता दीजिए? मध्यस्थ बल का स्त्रोत ये ही है कि परमाणु के केन्द्र मध्यांश में एक ही अंश जिम्मेदार होता है या सभी अंश?
उत्तर : ये बहुत बढ़िया! तो देखिए महाराज जी जीवन परमाणु में एक ही अंश ज़िम्मेवार है। भौतिक परमाणु में एक से अधिक अंश भी ज़िम्मेवार होते हैं। वो सभी अंश में इस प्रकार से आचरण है, वो पूरा का पूरा spin motion में रहते हैं, चाहे दो हो, दो सौ हो, वो सारे अंश, बीच में जो जमा रहते हैं, वो ज़ख़ीरा[1], वो सब का सब, एक-एक spin motion में रहते हैं, घूर्णन गति में रहते हैं। जो परिवेश में रहते हैं, वो घूर्णन गति में भी रहते हैं, परिवेश में भी घूमते रहते हैं। ये दोनों गति वो करते हैं, उसको हम ये धरती के रूप में देख सकते हैं। धरती घूर्णन गति भी करता है और motion भी करता है - आगे सरकता भी है।इन दोनों के फल स्वरूप कंपनात्मक गति है। कंपनात्मक गति वरतुलात्मक गति - दोनों चीज़ सिद्ध हो जाता है।ठीक बात है। इस ढंग से बनता है। कम्पनात्मक गति total सौरव्यूह के साथ जुड़ता है। उसी भांति एक परमाणु में सभी अंश मिलकर एक परमाणु हैं, उन परमाणु में कम्पनात्मक गति है। केवल एक अंश में कम्पनात्मक गति की बात नहीं आती है, सब मिलकरके कम्पनात्मक गति को प्रस्तुत करते हैं।
परमाणु as a whole में कम्पन्न है। ऐसा बात है। मध्य में रहते हैं वो, circular में रहते हैं वो - सब मिल करके एक कम्पन्नात्मक गति की शुरूआत रहती है। ये बढ़ते जाता है। (परमाणु मे तीन गतियाँ होती है )परमाणु में वर्तुलात्मक
ज़ख़ीरा - कोष; ढेर, राशि ↑