उत्तर : ये 121 हो सकता है।[इसका आधार क्या है।] इसका आधार ये है, भूखे परमाणु के अंत तक 60 होता है, 61 में वो अर्जीण परमाणु होता ही है। 61 orbit में होने से, मध्य में पुनः 61 होने से (पाँचवा orbit शुरू हो जाता है), ये हो गया अजीर्ण परमाणु। ऐसा परमाणु हो सकता है अस्तित्व में। उस प्रकार orbit में पूरा कर पूरा 61 परमाणु अंश हो, ऐसे परमाणु आपको मिल सकता है। तो उतना ही बीच में भी होगा, ऐसा वाला मिलेगा, वो जड़ परमाणु कहलाएगा। वो चैतन्य परमाणु नहीं होगा। इस प्रकार से क्या हुआ? 121 हुए। ज्यादा से ज्यादा 60 अजीर्ण परमाणु हो सकता है। अभी इस धरती पर कितने अजीर्ण परमाणु को नाप पाए हैं, पहचान पाए हैं, वो आप स्वयं सोच लो।
प्रश्न : इसमें 4 परिवेश हैं, तब ये कहना ठीक लगता हैं कि 121 प्रकार के परमाणु हैं। 4 परिवेश से ज्यादा परिवेश अगर हों, तो फिर और परमाणु की संख्या बन सकती है?
उत्तर : अजीर्ण परमाणु, ठीक है। इस प्रकार से 121 से अधिक प्रजाति होगा नहीं। अजीर्ण वाले जो है और टूटते रहते है। अजीर्ण होने से कितने भी टूटगें, जितने में आएगें उसका निश्चित कार्य है, वो गलत कार्य नहीं होगा। कुछ भी अंश में हैं, उसमें 20 टूट गया मान लीजिए, तो बाकी अंशों की जो परमाणु का आचरण है, वो निश्चित है, वोही आचरण करेगा। वो कोई ना कोई संख्यात्मक परमाणु ही रहेगा।
अजीर्ण परमाणु 121 होने के बाद वो अस्थिर हो जाएंगे। 121 के ऊपर वाले जितने भी अजीर्ण परमाणु होगें, वो जल्दी-जल्दी क्षरणशील हो जाएंगे, ये तो बात सच है, यदि होते हैं तो। होना कोई उद्देश्य नहीं बनता है। अस्तित्व के उद्देश्य में उसका उपादेयता नहीं के बराबर हो जाता है, क्योकि पुनः टूटकरके कोई ना कोई 121 के अंदर ही रहना है। ऐसा बनता ही रहता है। कोई एक निश्चित परिणाम के आधार पर या निश्चित उष्मा दबाव के अनुसार 121 परमाणु प्रजाति संख्या होते हैं। उसमें निहित होने वाले अंशों का संख्या ज्यादा होते ही है।
ज्यादा समय तक अपने यथा स्थिति को बनाए रखने में भूखे परमाणु ज्यादा जूझते हैं और अजीर्ण परमाणु कम जूझ पाते हैं। ऐसे बाते बताई चुकी है, counting हो ही चुकी है। वो भी 122 से यदि अधिक हो गया, वो दिन में चार बार टूटेंगें।
प्रजाति के बारे में 121 बताया। परमाणु अंशों के बारे में जो होता है, वो 121 से ज़्यादा होते ही हैं।
अजीर्ण परमाणु में जो प्रजातियाँ हैं 61 तक पहुँचने तक, अंशों को बढ़ाते-बढ़ाते 61 तक पहूँचते हैं। इधर 60 से घटाते-घटाते दो तक पहुँचते हैं, 60 परमाणु। दो अंश से कम कोई परमाणु होता नहीं। बस ऐसा बनी हुई है।