उत्तर : इसी कम्पनात्मक गति के आधार पर ही तृप्त परमाणु की घटना घटित हो जाता है। ये एक ऐसी व्यवस्था के रूप में इस धरती पर देखने को मिलता है।
बाबाजी 3 प्रश्न है एक तो मध्यांश के मध्य में जितने भी अंश रहते हैं, जो पार्थिव परमाणु में और जीवन परमाणु में एक ही अंश होता है।
ये तो कल आज आप हम निश्चित कर चुके है,परिवशों में जितने भी अंश होते है, बीच (मध्य) में उतना ही अंश होते हैं, भौतिक रासायनिक परमाणुओं में। उसमें केवल घूर्णन गति ही होता है। एक अंश रहे, चाहे हजार अंश रहे, वो घूर्णन गति ही करते रहते हैं। तब तक ही उसका नाम हैं मध्यांश। घूर्णन गति से यदि विचलित होता है, वो परिवेश में ही होगी। इससे क्या मतलब निकलता है? ऐसे ही अंशों की बढ़ती-घटती हुई विन्यास को देखने पर लगता है कि जब अंश समाता है किसी परमाणु में, वो पहले बाह्य परिवेश में ही पहुँचता है। उस से उसके भीतर की परिवेश, उससे उसके भीतर की परिवेश, जितना मध्य में पहूँचता है, पहुँच जाते हैं। उनमें स्वयं में ही उस व्यवस्था क्रम में वो अनुपातीय हैं। अपने को स्थिर व्यवस्था के रूप में व्यक्त करने के लिए अनुपातीय हैं, क्या चीज़ परिवेशीय अंश और मध्यांश। अनुपातीय होने की विधि से वो स्वयं में व्यवस्थाकृत हो जाते हैं। स्वयं स्फुर्त विधि से व्यवस्थाकृत हो जाते हैं।
व्यवस्था कार्य को संपादित करते हैं, कृत होने का मतलब। और व्यवस्था कार्य को जब संपादित करते हैं,वो उस अंश को जितना संख्यात्मक अंश हैं, ऐसे परमाणु का आचरण अपने को बहुत ही विश्वासदायक विधि से मिलता है। उसको आप प्रयोग भी करते हैं, वो विश्वास को निभता है।ठीक बात हो गयी ये समझ मे आ गयी ?आ गयी ना तो ये प्रमुख बात है। ये समझ में आने से हर वस्तु को व्यवस्था के रूप में देखेने की नजरिया आती है। व्यवस्था को यदि बिगाड़ने के लिए हम प्रवृत्त होते हैं, हमारा ही समझ हमको नियंत्रित करता है, ये करने योग्य काम नहीं है। ये किस आधार पर आता हे? ये मनुष्य के जागृत होने के आधार पर आता है। भ्रमित रहने से उसको भी बिगाड़ो, इसको भी बिगाड़ो, इसको भी बिगाड़ो, इसको भी बिगाड़ो होता है।
उसका छोटा सा Project हो गया। project के रूप में आप देखना चाहेगें, आप आदि काल से अभी तक बच्चे, संतान, माँ बाप के गोद में आते हैं, गोद में आते ही जैसे ही वस्तु को handle करने लगते हैं, उपयोग करने लगते हैं, हलचल पैदा करना चाहते हैं, सबको अलग-अलग कर तोड़कर, काटकर, टुकड़ा-टुकड़ा कर देखना चाहते हैं।ये क्या चीज़ है? ये भ्रमित रहने का लक्षण है। वो भ्रमित को हम जागृत करने के लिए शिक्षा देते हैं। काय के लिए शिक्षा देते है भ्रमित हो ने के लिए या जागृत।जागृति के बाद भी हम विखंडन ही करते हैं, तो हम जागृत हुए की भ्रमित हैं? माने शिक्षा के बाद भी हम विखंडन को ही पूजा मानते हैं, तो हम भ्रमित हैं कि हम जागृत हो गए? [भ्रमित] खतम हो गयी बात भ्रमित रहने के लिए यदि आप सारे बात जोड़े हैं, उसमें तो हम नारियल धूपबत्ती चढ़ाने के अलावा क्या करें?
प्रश्न : ये स्पष्ट हो गया ,मध्यांश मे घूर्णन गति से —--बल कैसे बदलता है।