प्रश्न : मध्यांश में अंशों में घूर्णन गति है, परमाणु में कम्पनात्मक गति है, घूर्णन गति नहीं है।
उत्तर : ऐसा नहीं है भई, पुनः वो ही बात हुआ! परिवेशों में जितने भी अंश होते हैं, उसमें घूर्णन गति होता है, वर्तुलात्मक गति भी होता है। वर्तुलात्मक गति का मतलब किसी गति पथ में आगे जाना, जैसा धरती।
प्रश्न : घूर्णन गति परमाणु में नहीं हैं?
उत्तर : हाँ, परमाणु में as a whole नहीं है। परमाणु में कम्पनात्मक गति होता है। परमाणु अंशों का कार्य का जो total है, वो कम्पनात्मक गति है। परमाणुओं का गति सहित ही एक परमाणु संज्ञा है, परमाणु नाम जो दे रहे हैं अपन कई अंशों का कार्य समूह को हम परमाणु नाम दे रहे हैं। इन सभी परमाणुओं का कार्य का जो वैभव है, एक कम्पनात्मक गति भी है, तो सभी ओर घूमने वाला भी गति है और इन दोनों के बाद वर्तुलात्मक गति भी है। इन तीनों का संयुक्त स्वरूप में एक परमाणु है। परमाणु घूर्णन गति है, ऐसा नहीं होता है, परमाणु वर्तुलात्मक गति है, ऐसा नहीं है। परमाणु में समाहित अंशों में वर्तुलात्मक गति, कम्पनात्मक गति, घूर्णनात्मक गति, इन तीनों को देखा गया है।ठीक है ना, ये तीनों एकत्रित हो करके एक परमाणु है। परमाणु घूर्णन गति को व्यक्त करता है, और कंपनात्मक गति को व्यक्त करता है और वर्तुलात्मक गति को व्यक्त करता है। इतनी ही बात है, छोटी सी काम है! जैसा, इसको बड़े रूप में लाओ, धरती को, धरती अपने में घूमता ही है, अपने आगे-आगे सरकता ही है, उसको हम उत्तर कहते हैं।
क्या कहते है उत्तर कहते है धरती सूर्य के सामने सरकता ही रहता है, सरकने वाला दिशा को हम उत्तर कहते हैं। जो आगे-आगे जाता है, उस भाग को हम उत्तर कहते हैं। ये समझ में आता है? ये सूर्य के सभी ओर घूमता है, उसके बावजूद भी हम उत्तर कहते ही रहते हैं। ये समझ में आता है आपको? लगाइए बुद्धि इसमें, बुद्धि लगाए बिना ये समझ में नहीं आएगा। जो यहाँ से शुरू किया धरती, इसके चारों ओर घूमा है, घूमते घूमते घूमते उसका सिर यहीं है, आगे ही है। ये आगे भाग को ही हम उत्तर कहते हैं, यहाँ आएगा तो भी उत्तर कहते हैं, यहाँ आएगा तो भी उत्तर कहते हैं, यहाँ आएगा तो भी उत्तर, यहाँ आएगा तो भी उत्तर कहते हैं। ऐसा चारों तरफ़ ये घूमते हुए धरती में आगे सरकने वाले भाग है, उसको हम उत्तर कह रहें हैं। ऐसा मैंने देखा है। ये घूमता हुआ जो पृथ्वी है, अपने में घूर्णन भी करता है, ऐसा पलटता ही रहता है। इसीलिए उदयास्त सूर्य के सम्मुख होता रहता है। घूमते समय अपने आप में dancing भी करता है, अपने आप में नृत्य किया, वो कम्पनात्मक गति हो गई। ओ कम्पनात्मक गति की अभिव्यक्तियाँ अपने ढंग से होता है, वर्तुलात्मक गति का अपने ढंग से अभिव्यक्ति होती है, घूर्णन गति का अपने ढंग से प्रमाण प्रस्तुत हो जाता है।
ऐसे जो कंपन है ये सौरव्यूह में सम्पूर्णता में ये तीनों चीज़ समाई है।क्या क्या समाया भाई? कंपनात्मक गति,घूर्णात्मक गति,वर्तुलात्मक गति। सूर्य घूर्णन गति में प्रतिष्ठित है, वहाँ वर्तुलात्मक गति नहीं हैं, उसको orbit में घूमना ही नहीं है। सूर्य कम्पनात्मक गति का धारक वाहक हो जाता है, पूरा सौरव्यूह का जो कम्पनात्मक गति है, उसका सूत्र उससे जुड़ी रहती है, सूर्य से जुड़ा हुआ। मध्य में यदि है सूर्य, सूर्य से ही जुड़ी हुई है, बंधी हुई है। कितना बढ़िया है ये काम? मध्यांश की तरह। इसी प्रकार परमाणु का बिलकुल हुबहू स्थूल रूप है ये सौरव्यूह। सौरव्यूह की क्रियाकलापों को ठीक से हम समझें, परमाणु को समझने में बहुत आसान। अति स्थूल रूप में यदि समझना हैं परमाणु को, ये सौरव्यूह ही है। गति प्रतिष्ठा में अंतर अवश्य होगी, परमाणु की गति अति तीव्र है, धरती का गति उतना नहीं है। इस सौर व्यूह