पहचान में आया है, जैसा चक्का घुमाना, चक्का घुमाना जो है - ये युद्ध को थोड़े ही सोच करके हुआ। नहीं हुआ। चक्का यदि समझ में आने की बाद उसको जो युद्ध में उपयोग करने की बात ज़्यादा attract हुए। वैसे युद्ध में engine को उपयोग करना, गाडी को उपयोग करना शुरू किया ही हैं। ये हमारा कहने की मतलब। आविष्कार एक अलग चीज़ है, मनुष्य को हाथ लगने की तरीका अलग चीज़ है। किस बात का हाथ लगना? वस्तु को निर्माण करने की मूलभूत प्रेरणा मिलना एक अलग चीज़ है। वो प्रौद्योगिकी में आना और जो वांछित व्यवस्था में प्रायोजित होना, एक अलग है। वांछित व्यवस्था में प्रायोजित होने के बारे में हम बात कर रहे हैं अभी।
प्रश्न : जी महराज जी लेकिन जब विज्ञान के इतिहास की बात करेंगे तो अनुसंधान की भी बात आएगी।
उत्तर : वो देखिये, ये विज्ञान और तकनीकी - दो बात है ये। तकनीकी, ये कोई पढ़ा लिखा आदमी से आविष्कार कम हुआ है। ठीक है? उस में यदि आविष्कार हुआ भी होगा, बाबा, तो इस प्रकार की चीज़ों को बनाने में कितना योगदायी है, उसको आप लोग इतिहास लिखोगे। ठीक है? तो जो वस्तु मूल में एक steam engine का प्रेरणा है, सामान्य बुद्धू आदमी के पास एक प्रेरणा आई। Telephone का प्रेरणा एक बुद्धू आदमी के पास आई और ये एक aeroplane को उड़ाने का प्रेरणा सामान्य एक mechanic को आई। इस प्रकार से सामान्य व्यक्तियों के पास ये सब चीज़ आया है। बहुत ज़्यादा पढ़ा लिखा हुआ आदमी के पास ये कुछ नहीं आया। जो पढ़े लिखे हुए आदमी के पास आया है परमाणु bomb बनाने की प्रेरणा, ये सब चीज़ें आया होगा, मेरे हिसाब से। उसको आप लोग सटीक देखेंगे। ठीक है ये। तो कहना, इसके बावजूद ये सब सामान्य व्यक्ति से आ तो गया, उसका उपयोग करने के लिए राज विधा में जो पहले consideration हुई है, ये सामरिक विधि में ही उपयोग करने की ज़्यादा से ज़्यादा प्रयत्न की है, ये हमारा कहने की मुद्दा है। ये उचित है?
प्रश्न : बाबा इसको दो स्तर पर हम लोग देख सकते हैं। एक तो विज्ञान और उससे पैदा हुई जो तकनीकी है। उसके उपयोग या दुरुपयोग के आधार पर उसके हम समीक्षा करें। दूसरा विज्ञान जिस अवधारणा पर आधारित है, हम उसकी समीक्षा करें। इसके विकल्प में सहअस्तित्ववादी विधि से विज्ञान का क्या सरूप निकलता है इसको प्रतिपादित करना ये ज़्यादा आवश्यक लगता है।
उत्तर : हाँ, जो एक सहअस्तित्ववादी विधि से विज्ञान का मतलब ये होता है - तो विवेक पूर्वक निर्धारित लक्ष्य के लिए दिशा निर्धारित करना विज्ञान का काम है। तो लक्ष्य क्या होता है, पूछा मानव लक्ष्य क्या होता है पूछा? तो जीवन जागृति परम लक्ष्य, एक। उसके लिए विज्ञान कैसा दिशा निर्धारित करता है, ये किया।
उसके बाद समाधान समृद्धी अभय सहस्तित्व ये मानव अपेक्षा है, मानव का लक्ष्य है। इसके लिए विज्ञान, क्या दिशा निर्धारित करता है, यही हमारा सहस्तित्वादी विज्ञान विवेक का मतलब है। इसमें परिवार से लेकर अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था तक लक्ष्य निर्धारित होता है, दिशा निर्धारित होता है, इसमें अपने को कोई hotchpotch भ्रम नहीं है, पूरा पड़ता है।
उसके बाद आता है जो प्रचलित विज्ञान के बारे में बताया, विज्ञान का सर्वोपरि उपयोग सामरिक तंत्र के लिए हुई, उपयोग के रूप में बताया। और विज्ञान का मूलभूत बात है वो ये है, विज्ञान अपने को सत्य को उद्घाटित करने के