उत्तर : साक्षात्कार से आदमी को ज्ञान का हर इम्पल्स (impulse) रोमाचिंत करता रहता है। साक्षात्कार लगातार है, पल्स (pulse) है, संगीत है, लय, ताल युक्त है।
प्रश्न : साक्षात्कार की वस्तु और बोध की वस्तु बिल्कुल एक है। दोनों क्रियाओं में अंतर क्या है, समझ में नहीं आ रहा हैं?
उत्तर : जैसा शब्द का अर्थ, अर्थ का साक्षात्कार और बोध। साक्षात्कार होता है तो बोध होता ही है, जैसा एक राग आदमी गाता है, उसको भैरवी नाम दिया और दूसरा राग का दूसरा नाम दिया। इन दोनों का अलग अलग तरीके की साक्षात्कार होता है। लय, ताल का चित्रण होता है। ताल का जो स्वरूप है, किसी काल खण्ड को नाप करके बताता है। ये चित्रण में आता है। स्वर जो हे, साक्षात्कार में आता है, स्वर यदि पहचानता है। जैसा- सात स्वर होता है, उन स्वर में से कोई चीज़ पहचान यदि होता है, वो साक्षात्कार में ही होता है। इसका उल्टा हुआ, स्वर जानना नहीं हुआ वो, अभी पहचानना हुआ। ये पहचान होने से रोमांचकता होता है। ये राग साक्षात्कार होना आदमी की एक सहज अधिकार है। ऐसा भी आदमी सोचा है, पूर्व काल में। “रसो वै सः” जो सोचा गई थी, उस संबंध में यही फलक्रम है। उसके ऊपर काफी प्रयोग हुई है, वो कैसे- कैसे पतन हुआ बाद में अपन विचार करेंगे। अभी जो है मनुष्य को साक्षात्कार होने का जो बात है, जो कुछ भी सामने वाला गाता है, उसमें एक स्वर है, एक ताल है, स्वर का साक्षात्कार होता है, यदि रोमाचिंत होना होता है तो। स्वर का अर्थ में जाने के बाद जानना ही हो गया। ठीक है ना।स्वर का साक्षात्कार होने मात्र से रोमांचकता होता है, स्वर में एक अर्थ है, वो साक्षात्कार होने से वो बोध हो जाता है। इसका मतलब ये हुआ, स्वर होने मात्र से बोध के लिए वस्तु पूरा नहीं हुआ। स्वर का अर्थ सहित स्वर हो वो बोध में जाता है।
प्रश्न : ये इसीलिए कम समझ में आया, क्योंकि स्वर ऐसे भी पता नहीं?
उत्तर : कोई ऐसा उदाहरण,जैसा आप ज्यादा frequency, low frequency में बात करते हो, हम धीरे भी करते हैं, जोर से भी बोलते हैं। तो जोर से बोलते हैं तो भी आपको पता लगता है की नहीं, इसका नाम है साक्षात्कार। क्या चीज़ है? ज्यादा बोला ये साक्षात्कार हुआ। बोलना चित्रण नहीं होता है, स्वर चित्रण के सीमा में नहीं आता है। स्वर और अर्थ में जो भेद है, उसको आपको बताना चाहते हैं। अब जोर से हम बोला ये आपको साक्षात्कार हो गया इससे आप पीड़ित हुए।
प्रश्न : बाबाजी मैं दूसरा एक उदाहरण देता हूँ, "मुझे प्यास लगी है, पानी पीऊँगा” ये वाक्य मैं बोल दिया, इसका एक अर्थ है, इस अर्थ का बोध होगा, साक्षात्कार या चित्रण?
उत्तर : ये साक्षात्कार होगा। करने का चित्रण होगा। पानी पिलाने की, पीने की चित्रण होगा, पानी का साक्षात्कार होगा, बोध होगा। इसका दो पार्ट (part) हो गए, पीने की क्रिया का चित्रण होता है, पिलाने की क्रिया-कलाप का चित्रण होता है, पानी का साक्षात्कार होता है, बोध होता है।
प्रश्न : बोध क्या होता है पानी में?