उत्तर : पानी है इसकी स्वीकृति रहता ही है बुद्धि में, या हो जाता है, दो में एक होता है।
प्रश्न : ऐसा एक उदाहरण जिसमें सिर्फ साक्षात्कार हो, बोध ना हो?
उत्तर : ऐसा होता नहीं, साक्षात्कार हो बोध ना हो ऐसा कोई अर्थ नहीं होता है। उसी के लिए हम लॉन्च किया था स्वर को। स्वर में ही आता है वो। तो वो स्वर से ही बात फ़िल्टर होता है वो। तो हमको स्वर साक्षात्कार हुआ, अर्थ साक्षात्कार नहीं हुआ, बोध में नहीं गया। बोध यदि होता है तो हमारा वस्तु होता है। उसका प्रमाण ये ही है।
प्रश्न :साक्षात्कार में वस्तु हमारा नहीं होता ?
उत्तर : ऐसे वस्तु जो दो पार्ट में हैं, एक ही पार्ट में हैं वो तो उसमे तो कोई शंका ही नहीं वो सीधे ही जाता है। जो दो पार्ट में हैं, ऐसे चीज़ें हमको पहले साक्षात्कार होते हुए बोध में नहीं पहुँचता है, क्योंकि उसका प्रमाणित हम नहीं कर सकते हैं।
प्रश्न : बाबाजी वस्तु का स्वभाव, धर्म इन दोनों का साक्षात्कार होता है और दोनों का ही बोध होता है।
उत्तर : क्योंकि रहता ही है वो, वो रहता ही है अस्तित्व में। ये स्वर क्या है? ये हम अपने हैसियत से प्रदर्शित करते हैं। स्वर, ताल ये दोनों प्रदर्शन हैं, उसमे निहित अर्थ अस्तित्व में है।
प्रश्न : जो नाड़ी देख के रोग को पहचानते है? स्वास्थ्य को पहचानते है, ये साक्षात्कार है, बोध है, चित्रण है?
उत्तर : ये जो है ना इसको कहा जाए साक्षात्कार तक का ही चीज़ जाता है, संकेतो का अर्थ जो है, शरीर में जो होने वाली क्रिया के रूप में उसमें पहुँचता है, उसको साक्षात्कार तक कहा जा सकता है। स्वास्थ्य का बोध रहता है, वो हमारा स्वत्व है, स्वस्थता का बोध हमारे पास रहता है, तभी हम चिकित्सा कर पायेंगे।
प्रश्न : मतलब एक संतुलन की स्थिति है, उसका अन्य को बोध है पहले से, नाड़ियों का, उसकी अपेक्षा में ज्यादा कम हो गया तो हम सोचते हैं। वो क्षणिक रहता है पर साक्षात्कार है।
उत्तर : हाँ, ऐसा।
प्रश्न : किसी वस्तु का साक्षात्कार हुआ, उसका बोध हुआ, बोध हुआ तो जानना हो गया?
उत्तर : देखो, कई ऐसे चीज़ हैं, लक्षणों का साक्षात्कार होता है, वस्तु का साक्षात्कार, बोध दोनों होता है। वस्तु नित्य वास्तविक वैभव है, इसीलिए वस्तु नित्य होना पाया जाता है। इस विधि से कुछ लक्षण साक्षात्कार तक जाता है, उसमें वस्तु ना होने के कारण वो बोध होने से रह जाता है, उसमें से वो स्वर को बताया। वैसे ही स्वास्थ्य, जो रोग को हम देखते हैं, इसमें आवेश का साक्षात्कार होता है, क्योंकि जो रसों का आवेश को चित्र में लाना होता नहीं। चित्र में सीमित नहीं होता है। धातुओं का असंतुलन को चित्र में लेना संभव नहीं है, अभी सारा मेकनिज़म कहाँ फैल है?