उत्तर : जानने मानने की तृप्ति, दो component होंगे, हर जगह में। दो component के बीच में जो संगीत होता है, वो ही तृप्ति है। जानने मानने की तृप्ति, जानने से मानने में जो हमारा पूरा सटी हुई जगह, मानने से जानने की सटी हुई जगह वो तृप्ति बिन्दु है। जानना, मानने में कोई विरोध नहीं कर रहा है, negation में बात करें, बल्कि सकारात्मक रूप में स्वीकार रहा है। जानने वाला जो भाग है, मानने को स्वीकार कर रहा है। मानने में जानना अपने आप में स्वीकार है। अब इसी का सारा projection है, मूल में ये दो ही component हैं।
प्रश्न : क्या इसके बाद मानने और पहचानने में भी ऐसे ही तृप्ति बिन्दु?
उत्तर : हाँ, ऐसे ही है, जानना, मानना, पहचानना, निर्वाह करना चार भाग। अब अंतर्मुखी विधि से क्या है? जानना, मानना, पहचानना तीन component पूरा हो जाता है। निर्वाह करना, एक component शरीर के द्वारा निर्वाह होना है। माने तीन भाग केवल जीवन में ही workshop हो जाता है, एक भाग जीवन और शरीर के संयुक्त रूप में workshop होता है। इसका परिणाम क्या है? समाधान, सफलता = समाधान। क्या सफलता? जानने, मानने में सफलता। एक दूसरे के बीच में संगीत, तृप्ति, मानने और पहचानने में तृप्ति, 2 तृप्ति बिन्दुएं मिल गई और पहचानने, निर्वाह करने में तृप्ति, पुनः निर्वाह करने और जानने में तृप्ति। इस ढंग से 4 तृप्ति बिन्दु मिलता है। इसमें हर दिन आवर्तनशील होता रहता है, कोई क्षण इससे रिक्त नहीं हो सकती है। कोई कार्य इससे रिक्त नहीं हो सकती है।
प्रश्न : जानने, मानने की 5 बिन्दुएं है, ऐसे आप समझाते रहते हैं, अस्तित्व, विकास क्रम, विकास, जागृति क्रम, जागृति।
उत्तर : जानने की बिन्दु इतना है, इसमें हम प्रमाणिक होने की तरीका सहित मानना होता है।यदि जान लिया हमने उसको प्रामाणिक होने की तरीक़े सहित उसको मानना बनता है।आप हूँ कह दिये तो मानना हुआ नहीं।
प्रश्न : दूसरे को समझाने योग्य हूँ, ऐसा भी हो गया। अस्तित्व सत्ता है, प्रकृति है, उसको जान लिए। ऐसा ही जीवन भी जान गए, मान गए, तो जीवन जागृति भी जानना, मानना पड़ेगा।
उत्तर : जानने, मानने की तृप्ति बिन्दु = अनुभव। पहले वो formula को fix करो। इसको ठीक से समझो। मानना कब हुआ बताया? हम प्रमाणित करने की component के साथ-साथ हम मानते है, उसका प्रमाण क्या है? हम प्रमाणित कर देते हैं। आप जाने हो, माने हो, इसको आप प्रमाणित कर देते हो। किस आधार पर? पहचानने, निर्वाह करने के आधार पर।
प्रश्न : जैसे जीवन जागृति भी जानने, मानने की एक बिन्दु है, तो जीवन जागृति को प्रमाणित कर देगें, उसके बाद अनुभव होगा?
उत्तर : जानने के बाद मानना होता है। वस्तु को हम बोध करने के बाद, वस्तु को हम प्रमाणित करने योग्य हूँ, इस बात को मानना होता है। मानना क्या चीज़ है? हम प्रमाणित कर सकता हूँ, इसको मानना।
प्रश्न : कर सकता हूँ या कर दिया हूँ?