तो आदमी जात की प्रवृत्ति के आधार पर घटना की design है। ये बात समझ में आता है? ये घटनाएँ मनुष्य घटाते आया, घटते ही आई और उसका परिणाम होते ही गया। उसी क्रम में धरती का बीमार होना भी हम पा रहे हैं। ठीक बात है ये? अब उसके बाद होता है, जो धरती की कार्य विधि में घटित होने वाले काम। उसको दो बात बताया - एक तो भूकंप बताया और दूसरा चक्रवात वगैरह बताया, तीसरा हो सकता है ज्वालामुखी। तीन बात हो सकता है। ये तीन बात घटित हो सकता है। तो इन तीनों बातों से जागृत आदमी बच सकता है।
प्रश्न : जैसे एक बच्चा अभी पैदा नहीं हुआ है, उसको इतनी-इतनी उम्र में इस-इस तरह का रोग की संभावना बनती है। बच्चा के जन्म के पहले ही, वो बच्चा इस तारीख तिथि को पैदा होगा, तो इस तरह के रोग, इस तरह की बीमारी, इस तरह की घटनाएं, इस तरह की पत्नी होगी, उसकी जो भविष्य वाणी करते हैं और जिसको आगे जा कर सही उतरते भी देखा गया है, वो किस आधार पर है?
उत्तर : वही ब्रह्माण्डीय किरणों के आधार पे है।
प्रश्न : तो घटना का निश्चित होना वही तो है? इस आधार पे, अभी तो उसकी प्रवृति को हम को मालूम नहीं है कैसा प्रवृति होगा?
उत्तर : वो ठीक है भाई, उस लग्न में बच्चे को मत बुलाइये, लग्न को बदलिए। आप ही से तो घटित होता है, बच्चा आना। काहे के लिए उसमें सर कूटी?अपन फ़ालतू बातों में फँस गये। मनुष्य ही बच्चा पैदा करता है, ये बात सही है या गलत? सही समय में पैदा करिए, एक ही उत्तर। उसको ज्योतिषी बताता है, हम बताते हैं। कोई ज्योतिषि नहीं बताता है तो हम बताते हैं। नहीं करना है तो, करिए जैसा करना है।
प्रश्न : लग्न के आधार पे, यदि बच्चे के पैदा होने के समय के आधार पे उससे जुड़ी हुई घटनाएँ तय होती हैं, तो घटना के लिए किसी आदमी के जिन्दगी में ग्रह-नक्षत्र का प्रभाव हो गया, हर आदमी के जीवन में जो अलग-अलग शुभ, अशुभ घटना घट रही हैं, उसका मामला ग्रहों से control हो गया? जीवन का इसमें क्या role है?
उत्तर : इसको अच्छे से समझो, ये जो बात है रोग-राटा शरीर की बात कर रहे हैं अभी, बाकी बातों को ताक में रखो। निरोगी बच्चा चाहिए, उसके लिए हम समय बताते हैं, पैदा करिए, निरोगी बच्चा होगा, खतम हो गया बात। ठीक है? आपके अनुसार रोगी भी होगा, निरोगी भी होगा - ऐसा बात random में चलती रहती है, अभी वैसे ही चल रहा है। सभी रोगी हो गये ऐसा भी नहीं हैं, सभी निरोगी हो गये ऐसा भी नहीं है। ये भी सच्चाई है - निरोगी अधिक हैं, रोगी कम हैं। आज के तालिका में।
प्रश्न : मानव की जिंदगी में घटने वाली घटनाओं का उसके लिए उसकी पूर्व शरीर यात्राओं का भी कोई भागीदारी है कि ये उससे बिलकुल स्वतंत्र है?
उत्तर : देखिए इसमे जितने भी बात, अभी जो आप जिस नबज की बात कहे, उसमें से हम लोग संस्कार को पहचानते हैं। संस्कार समझदारी के आधार पर ध्रुविकृत है। नासमझी का कोई संस्कार होता नहीं। इसको ऐसा हम गणित को बताते हैं। नासमझी का कोई भी संस्कार नहीं होता है, बेवकूफी का कोई संस्कार होता नहीं है, और ईमानदारी,