संस्कृति, सभ्यता, विधि एवं व्यवस्था का आधार मानवीयता है, क्योंकि मानवीयता में ही सामाजिकता स्थापित सिद्ध है। अमानवीयता की सीमा में सामाजिकता की संभावना नहीं है, जबकि अतिमानवीयता में सामाजिकता समायी हुई है, इसलिए मानवीयता का आधार स्थापित संबंधों में निहित स्थापित स्थायी मूल्य ही है।
स्थापित मूल्यों में, से, के लिए ही स्वस्थ व्यवस्था स्थित है। चूंकि स्थापित मूल्यों की अनिवार्यता सर्वदा सबके लिए समान है, इसलिए स्थापित मूल्य ही विधि है। स्थापित मूल्यों का निर्वाह आचरण पूर्वक है, जो स्वयं में संस्कृति व सभ्यता है। यह सब मानवीयता में सहज प्रमाण परंपरा सिद्ध होता है।
वस्तु मूल्यों का नियंत्रण व्यवस्था पर है। उत्पादन सिद्ध वस्तुएं आवश्यकता के आधार पर दृष्टव्य हैं, इसलिए उनका मूल्य निर्धारण उन पर स्थापित की गई उपयोगिता एवं सुन्दरता के आधार पर ही है।
आवश्यकताएं सामयिक हैं। प्रत्येक समय में प्रत्येक मानव को प्रत्येक वस्तु की आवश्यकता समान रूप से सिद्ध नहीं होती, जबकि स्थापित संबंधों की अनिवार्यता निरंतर है, जो प्रसिद्ध है। इसलिए आवश्यकताएं सामान्य एवं महत्वाकाँक्षा की सीमा में ही हैं। इन सब का उपयोग समाज गति के अर्थ में सामयिक है। इसलिए संबंधों के निर्वाह में ही वस्तुओं के उपयोग, सदुपयोग व वितरण प्रयोजन की सीमा में समाहित हैं।