सामाजिक मूल्यों की वहन क्षमता = सभ्यता
उपयोगिता व सुंदरता मूल्य समाज मूल्य में समाहित या समर्पित है। व्यवहार में ही इन दोनों की प्रयुक्ति है। इसलिए संपूर्ण प्रयुक्तियाँ जीने के लिए अथवा जीवन के लिए ही है। “शरीर के लिए समृद्धि एवं जीवन के लिए समाधान व अनुभूति आवश्यक तथा अनिवार्य है।”
समाधान व अनुभूति ही मानव में पाई जाने वाली विशिष्टता है। यही प्रबुद्धता, प्रभुता एवं अभयता है।
आवश्यकता से अधिक उत्पादन एवं शेष के प्रयोजनार्थ वितरण में समृद्धि पूर्वक समाधान, व्यवहार, आचरण एवं अनुभव में प्रबुद्धता प्रसिद्ध है।
मानव के प्रत्येक स्तर में आवश्यकता से अधिक उत्पादन, न्यायपूर्ण आचरण व्यवहार के रूप में अनुभव प्रभुता प्रत्यक्ष है।
शिष्ट मूल्य ही अनुभव को इंगित करता है, यही सभ्यता व शिक्षा है। प्रत्येक मानव में किसी से शिक्षित होना या किसी को शिक्षित करना प्रसिद्ध है। शिष्टता में ही उपयोगिता व सुंदरता संयत रूप में प्रयुक्त होती है। संयमता ही सदुपयोग है। सदुपयोग एवं सुरक्षा ही सतर्कता का प्रत्यक्ष रूप है। यही सामाजिकता का कार्य कारण एवं लक्ष्य भी है।
शिष्टता की अभिव्यक्ति प्रसिद्ध है। मानवीयता में शिष्टता की प्रतिष्ठा व अखण्डता है। यही सफल जीवन का प्रत्यक्ष रूप है, जो अखण्ड समाज की दश सोपानीय व्यवस्था में अनिवार्यत: अनुवर्तनीय है।