प्रत्येक मानव संपूर्ण मूल्यों को शिष्ट मूल्य सहित निर्वाह करने के पक्ष में है। सबन्धों का निर्वाह न होना ही अव्यवहारिकता अर्थात् अमानवीय व्यवहार, उद्दण्डता, अराजकता एवं अस्थिरता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मानव संबंध विहीनता में, से, के लिए स्वीकार नहीं है। यही सत्यता व्यवहारात्मक जनवाद को उद्घाटित करने का प्रधान कारण है। स्वयं के समर्पण का
तात्पर्य ही है निर्वाह करना। जितने भी परिप्रेक्ष्यों में निर्वाह क्षमता प्रकट हुई है, ये सब समर्पण से प्राप्त गुणात्मक परिवर्तन के रूप में ही स्पष्ट हैं। समर्पण में पूर्ण स्वीकृति होती है। जो जिसे स्वीकार नहीं करता है उनमें परस्पर समर्पित होना संभव नहीं है। जो जिसको स्वीकारता है, उसको वह आत्मसात कर लेता है या आत्मसात होता है, जो स्पष्ट है।
जन्म से ही मानव में संबंध का होना पाया जाता है। संबंध विहीन जन्म, जीवन परंपरा नहीं है। शरीर सहित जीवन संबंध में इसे स्पष्ट करना होना ही अध्ययन है। मानव के जन्म जीवन काल में ही समाज एवं सामाजिकता के अध्ययन की अनिवार्यता है। यही अनिवार्यता संबंधों के निर्वाह के लिए प्रेरणा है। यह जन्म से ही आरंभ होता है। जैसे :-
- प्रत्येक माता-पिता अपनी संतानों का पोषण करते हैं, करना चाहते हैं।
- प्रत्येक शिक्षार्थी शिक्षा पाना चाहता है।
- प्रत्येक शिक्षक शिक्षा प्रदान करना चाहता है।
- प्रत्येक व्यक्ति न्याय पाना चाहता है और सही कार्य-व्यवहार करना चाहता है।
- प्रत्येक व्यक्ति परस्परता में कर्त्तव्य एवं दायित्व निर्वाह की अपेक्षा करता है और स्वीकारता है।
- प्रत्येक व्यक्ति भौतिक समृद्धि और बौद्धिक समाधान चाहता है।
इसलिए प्रत्येक स्थापित संबंधों में निहित संपूर्ण मूल्यों का निर्वाह ही सामाजिकता का प्रत्यक्ष रूप है। यही निर्विषमता सहअस्तित्व का भी प्रत्यक्ष रूप है। इसमें संदिग्धता या विषमता ही अर्थात् स्थापित मूल्यों का निर्वाह होने में जो असमर्थता है, अन्याय एवं भय के रूप में भासित होता है। फलत: उनके निराकरण के लिए प्रयास होते हैं। इसी प्रयास क्रम में मानव मानवीयता को स्वीकारने के लिए उत्सुक हो जाता है।
समाज संरचना शुद्धत: मानव की परस्परता में स्थापित संबंध ही है। यही समाज की आद्यान्त संरचना है। संबंधों की अक्षुण्णता उसमें स्थापित मूल्यों का निर्वाह ही है। यही मानव जीवन की गरिमा है। स्थापित मूल्य अनुभूति है। मानव जीवन अनुभव क्षमता सम्पन्न है। यही क्षमता मूल्यों का अनुभव करने के लिए प्रवृत्त है।