प्रश्न : बाबाजी इसका अर्थ ये है क्या कि जो जीव अवस्था में जितने भी जीव हैं उन सब मे जीवन परमाणु होता है क्योंकि मानव संकेत को ग्रहण कर सकते हैं वो।
उत्तर: सप्त धातु से शरीर रचित हो -पहला उसके बाद मेधस तंत्र समृद्ध हो गया- दो, उसके बाद मानव के संकेतों का ग्रहण करता हो अनुकरण करता हो (ऐसे जीव कितने हैं, कौन कौन से हैं?) हम तो बताए ना भाई दो चार को हम परीक्षण किया, आप परीक्षण करिए( यानी इसकी संभावना है कि बहोत सारे जीव हैं) बहोत सारे जीव होंगे। हम तो दो-चार, जैसा की अभी गधा,घोड़ा, कुत्ता-बिल्ली की बात किया, इसमें मानव का संकेतों को ग्रहण करने की उचित व्यवस्था है, इसीलिए इनको जीवन संचालित करता है, मैं ऐसा कह रहा हूँ। ठीक है?