हुई है। वो भुनगी कीड़ा से क्या हो गया? कोई चीज़ ऐसी हुई जैसा चींटी मकोड़ा में से अंडज हो गया। बाक़ी क्या है, अपने आप से मर गए, पुनः वो सब उसका जितना भी अवशेष है, वो ही बीज रूप में काम करता रहा, पुनः पानी मिल गया तो उसी प्रकार की भुनगी कीड़ा हो गए। इस प्रकार से ये एक परम्परा बनी। इस भुनगी कीड़ा से अंडज संसार शुरूआत हुआ। वो अंडज संसार विकसित होते होते होते चिरैय्या, गौरैय्या, बहुत सारे जगह में पहुँच गया। वो ही धरती में चलने वाले भी आ गए, जल में चलने वाले भी आ गए, आकाश में उड़ने वाले भी आ गए। इस ढंग से बात आ गई। इसको परम्परा बनी। इसका परम्परा का एक अपना आधार बना। किससे विकसित हुआ ये? प्राणावस्था के झाड़ी जंगल से विकसित अवस्था ये माना गया, जैसा गाय, घोड़ा, गधा, कुत्ता, बिल्ली, ऐसे सभी जीव जानवर तैयार हो गए।
जब ये तैयार हो गए इससे अच्छा एक रचना की आवश्यकता बनी - मनुष्य शरीर का रचना। मनुष्य शरीर का रचना उसके बाद शुरू हो गई, ये सब तीनों तैयार होने के बाद। मनुष्य तैयार हुआ तो कहाँ तैयार हुआ होगा? जंगल में। जंगल को मैदान बनाया, मैदान बना करके घर बनाया, घर बना करके गाँव बनाया, बस्ती बनाया, नगरी बनाया, सड़क बनाया, ये रेल, गाड़ी, घोड़ा, सब चला-चुला करके दिखा दिया। यहाँ तक हम आ गए हैं। तो इस ढंग से क्या हो गई? जीवावस्था में जो विकास स्पष्ट हुई और प्राणावस्था से ज़्यादा लगा, और जीवावस्था से अधिक विकास मानव में स्पष्ट। इस ढंग से एक प्रकार से अभी वस्तुओं का उपयोग करने के विधि में, भाषा के विधि में, मनमानी करने के विधि में, ये सब में जीवों से ज़्यादा दिखाई पड़ रहा है, आपके सम्मुख, मेरे सम्मुख। ये हो गई, इस ढंग से इसको हम विकास कहते हैं।
प्रश्न : जीव अवस्था में जो निर्माण क्रम है शरीर का, उसमें प्रचलित प्रश्न है कि मुर्गी पहले की अंडा पहले?
उत्तर : इसका बात ऐसे आता है बाबा, वो अभी आपको बताया - पत्ता पतंगड़ एकत्रित होने से भुंगी कीड़ा तैयार हुआ। इसका नाम है स्वेदज संसार। स्वेदज से अंडज connect हो गया। आपको खुद पता लगता है, मुर्गी तैयार हुआ कि अंडा तैयार हुआ? अंडज संसार विकसित होते-होते मुर्गी तक आया और हंस तक गया, मोर तक गया, एक तक गया, तीन तक गया, सब कुछ हो गया। इस ढंग से बनी हुई है। वो ही अंडज संसार पिंडज संसार तक छुआ दिया, जोड़ दिया। पिंडज संसार में गाय, घोड़ा, कुत्ता, बिल्ली सब आ गए, मनुष्य भी आ गए। इस ढंग की ये विकास को पहचानने की विधि बनी।
(इसका मतलब है किसी स्वेदज ने पहली बार अंडा दे दिया) वो और ज़्यादा विकसित होता गया, होता गया, सभी प्रजाति बन गए। पहले कीड़ा मकौड़ा बना। उसके बाद अंडा बन गया, वो अंडे का परम्परा बनी। स्वेदज कीट मकौड़े में से अंडज संसार स्थापित हुई, अंडज संसार पिंडज संसार को छुआ दिया, connect कर दिया, पिंडज संसार में मानव एक इकाई है। इस ढंग से जुड़ी हुई है। इस ढंग से बीज विधि बनी, अंडज, पिंडज, स्वेदज और उद्भिज्ज। उद्भिज्ज का मतलब है धरती को फोड़ करके नीचे से आता है। ठीक बात हो गई? इस ढंग से बीज विधि बनी। उसका नियंत्रण आया। मनुष्य जो है ना अपने समझदारी के आधार पर जीता है, नियंत्रित रहता है। संस्कार के आधार पर, समझदारी के आधार पर जीता है आदमी। जीवों का काम वंश के आधार पर जीने की बात हुई, ये प्रमाणित हुई और वनस्पतियाँ