बीजों के आधार पर परम्परा बनाने की बात हुई। उसको विज्ञान विच्छेद करने के लिए कोशिश कर रहा है। ये सब बातें आपके सम्मुख हैं।
प्रश्न : जीवावस्था के शरीर की स्थिति, उसमें जीवन का प्रकाशन, जीवन का स्वरूप किस प्रकार है?
उत्तर : जीवन का स्वरूप तो एक ही होता है, गठनपूर्ण परमाणु कहलाता है। वो ही जीव शरीर को भी चलाता है, मनुष्य शरीर को भी चलाता है। इसमें इतना ही है, जीव शरीर में जो ज़्यादा रुचि लेने वाले जीवन जीव शरीर को चलाते हैं और मनुष्य शरीर में रुचि लेने वाले जीवन मनुष्य शरीर को चलाता है। इतने ही बात है। तो जिसमें जिस जीवन को रुचि हो जाए। इस ढंग से शरीर को चलने वाली बात होता है।
शरीर रचना में जो विशेषताएँ हैं, वो ऐसे शरीर में जीवन उस शरीर को चलाता है जिस शरीर में मेधस तंत्र बहुत अच्छा विकसित हो गया है। और मनुष्य में आ करके मेधस तंत्र पूर्णतया विकसित हुआ है। इसमें जानने, मानने, पहचानने की और उसको प्रकाशित करने की, प्रमाणित करने की पूरी योग्यता समाई हुई है। इस ढंग से सबसे ज़्यादा विकसित शरीर रचना मानव शरीर रचना है, उसके बाद जीव शरीर रचना है। उसके पहले जितने भी झाड़ झंकार ये सब रचनाएँ होते हैं, ये सब प्राण कोशा से ही होते हैं। जीवन एक अलग चीज़ है, शरीर रचना एक अलग चीज़ है। शरीर रचना advanced होता है. जीवन जो है एक परमाणु का स्वरूप में गठनपूर्ण स्थिति में वो अपने वैभव को प्रकाशित करता है। इस ढंग की काम है ये, छोटा सा काम।
प्रश्न : जीवावस्था के किन शरीरों में जीवन प्रकाशित हो रहा है, इसको कैसे पहचाना जाए?
उत्तर : उसको पहचानने की विधि ये है -ये तो सप्त धातुओं से रचित हुआ शरीर - नम्बर एक। समृद्ध मेधस हो - दो। उसके बाद मानव का संकेतों को ग्रहण करता हो, वो सभी जीव में जीवन ही संचालित किया रहता है। जिनमें मानव के संकेतों को ग्रहण नहीं कर पाता है, उस शरीर को जीवन संचालित नहीं करता है। जीवन ही जीवन को सुनता है। अभी आप भी जो सुन रहे हो, मैं जो बोल रहा हूँ, सुनते हैं, बोलते हैं, ये जीवन ही बोलता है, जीवन ही सुनता है। और कोई चीज़ सुनने वाला नहीं है। ठीक हो गई? इस ढंग से मानव का संकेतों को ग्रहण कर लेता है, ऐसे जीवों में जीवन काम करता रहता है।
उदाहरण - गाय, गधा, घोड़ा, गधे से भविष्यवाणी को कराते हैं, चिरैय्यों से कराते हैं। नहीं कराते हैं? गाय से कराते हैं। ये सब मानव का संकेतों को सुनते हैं कि नहीं सुनते हैं? सांप भी सुनता होगा कोई प्रजाति की, कोई प्रजाति का नहीं सुनता होगा, क्या आपत्ति हो गई? जो-जो मानव का संकेतों को ग्रहण कर पाता है, अनुकरण कर पाता है, वो सब में जीवन है ही।
प्रश्न : जैसा चमगादड़ पिंडज है, तो उसमें कैसे देखें?
उत्तर : उसको परीक्षण करने की बात है क्या मानव का संकेतों को क्या ग्रहण करता है? पिंडज होने मात्र से ही सभी मानव का संकेतों को ग्रहण करना है, ऐसा कोई क़ायदा नहीं है। इसको हमको परीक्षण करके ही देखना है। हम दो-चार परीक्षण करके देखा हूँ, हमारे लिए पर्याप्त है ये। और जो परीक्षण करना है, करते रहिए।