उत्तर : वैसे ही विचार का भी वैसे ही है।
प्रश्न : कुछ घटनाएं जो भविष्य में होने वाली हैं, वो दिखाई दे जाती हैं।
उत्तर : मनुष्य का कल्पनाशीलता की एक क्षेत्र बना रहता है, हर व्यक्ति का। उस कल्पनाशीलता के क्षेत्र के अंदर, भावी क्षणों में घटित होने वाले बहुत सारे झाँकी, कल्पना में आ जाता है। उस आधार पर हम सोचते हैं, पहले से हम ऐसा देखा, घटित हो गया। ऐसा कहते हैं।
प्रश्न : भूतकाल में जो घटनाएं घट चुकी हैं, जिनको हम जानते नहीं हैं, उनको जब ध्यान से देखा जाए, तो क्या उसमें से कुछ घटनाएं दिख जाती हैं, समझ में आ जाती है क्या?
उत्तर : भूतकाल का जितने भी घटना है, किसी ना किसी की स्मरण की संप्रेषणा होना चाहिए, स्मरण, संप्रेषणाएं होती रहती हैं, उन वैचारिक संप्रेषणा में कोई ना कोई संप्रेषणा करता रहता है, आप देख लेते हो। उस घटना की स्मृति किसी ना किसी जीवन में रहती ही है, वो संप्रेषणा जो है आपके कल्पना रेंज (range) में आ गई, आपको वो डिजाइन (design) मिल गई आप सोचा की ऐसा घटित हो गया।