प्रश्न : मेरा प्रभाव अभी लोगों पर पड़ रहा है यहाँ जो लोग आ रहे हैं मैं इसको अच्छा मानता हूँ तो लोग इस जगह को अच्छा मानते हैं उसके पीछे मेरा भी एक विचार कारण है, तो जैसे ही मेरा विचार परिवर्तित हो जाता है उसी क्षण से ये बंद हो जाता है क्या या एक दो घंटे बाद?
उत्तर : आपका समप्राप्ति की विधि है वो बंद हो जाता है।
प्रश्न : मेरी संप्राप्ति की विधि तो बंद हो गयी लेकिन मेरे से दूसरों को जो प्राप्त हो रहा है?
उत्तर : वो तो आप जो दे रहे हो वो मिलता रहेगा।
प्रश्न : उसी क्षण से बंद हो गया?
उत्तर : आपके पास दो क्रिया होता है न, पहुँचाने वाला, ग्रहण करने वाला। अभी ग्रहण करने वाला बंद कर दिया तो आपको ये आश्रम अच्छा है ऐसा नहीं दिखा। आप जो पहुँचाते रहते हो पहुँचाते रहो, प्रभाव पड़ता ही रहता है।
प्रश्न : जैसे अभी तक मैं अच्छा विचार पहुँचा रहा था, तो उनको अच्छा मिल रहा था। अब मैंने अच्छा विचार अपना बंद कर दिया, अब मैंने बदल दिया उसको उलट कर दिया तो वो बुरा वाला विचार उन तक कब पहुँचेगा? तुरंत पहुँच जाएगा?
उत्तर : पहुँचाने वाला आपका capacity अलग है, वो दरवाजा अलग है, ग्रहण करने वाला दरवाजा अलग है। आप ग्रहण करने वाले दरवाजे को बंद करने पर ही ये जगह खराब दिखना शुरू किया, अब आप जो पहुँचाते हो पहुँचता रहेगा।
प्रश्न : यदि पहुँचाने वाले को मैं change कर दिया?
उत्तर : चेंज किया तो वो ही जाएगा।
प्रश्न : उसी क्षण से?
उत्तर : हाँ।
प्रश्न : और पहले वाला खतम हो गया, उसी क्षण से?
उत्तर : जो तरंग पैदा हुआ है वो सामान्य होने की जगह में ही जाता है।
प्रश्न : उसमे कितना समय लगता है?
उत्तर : उसमे समय कुछ नहीं, आपने शब्द बोला, हमको बोला, हम सुन लिया/ नहीं सुना। खतम हो गई बात।
प्रश्न : ये तो शब्द का कंपन है खतम हो गया।