उत्तर : प्राणवायु का मतलब ये होता है, जो अपने फेफडे़ में जा करके सम्पूर्ण प्राणकोशाओं के लिए जो वायु की जरूरत है, उसका नाम है प्राणवायु। सम्पूर्ण कोशाएँ जो श्वास प्रश्वास करते रहते हैं, हर कोशाएँ जो साँस लेने के लिए जो हवा चाहिए, उसका नाम है प्राणवायु। उस प्राणवायु के अलावा और कुछ भी हमारा नाक से, मुँह से जाता है, उसको फेफडे़ में छान देता है। छान करके जितना प्राणकोशाओं की जरूरत की हवा है, उसको भेज देता है। भेज करके वो प्राणकोशाएँ हवा को सेवन करते हैं, स्वस्थ रहते हैं, वो हवा ना मिलने से मर जाते है। इतनी ही बात है। हवा के बिना प्राणकोशाएँ रह नहीं सकती। उनको जिस प्रकार की वायु चाहिए, वो मिलने का जो प्रणाली है, उसका नाम प्राणतंत्र है। वो प्राणतंत्र फेफडे़ से संबंधित हैं। फेफड़े में ही उसके अतिरिक्त बाकी चीज़ों को अलग करता है।
अलग करने के बाद ये प्राणवायु सभी कोशाओं के सुगम हो जाता है, वायु संचार उसको कहते हैं, शरीर में - प्राणवायु संचार विधि। और उसके बाद प्राणकोशाएँ जो हवा को निकालते हैं, वो सब निकल करके बाहर आते हैं, और जो हम खाएँ रहते हैं, उसमें से जो उपयोगी वस्तुएँ हैं शरीर में लगता है, और उससे जो अनुपयोगी वस्तु रहती है, उसे अपान वायु तैयार होता है। प्राण कोशाओं से बाहर आया हुआ और हमारा खाया हुआ तत्वों से अपान वायु तैयार होता है। इस ढंग से प्राण वायु, अपान वायु की पहचान हो पाता है।ये सर्व मानव को विदित होगा।इसको ज्ञान कराने में कोई देर लगेगा ऐसा हमारा सोचना नहीं है।
प्रश्न : जीवन और मेधास के बीच में भी प्राणवायु है ?
उत्तर: मेधस तंत्र में जो प्राणकोशाएँ है, उनको भी प्राणवायु चाहिए। वो फेफडे़ से ही संचालित है। ये अभी बताया, पुनः पुनः वही पहुँचते हैं। मन को लगाना पड़ता है। यदि मन को लगाया नहीं तो उल्टा सीधा प्रश्न करोगे ना।सिलसिले से करिए ,एक ईंटे के बाद एक ईंटा रखा ही हुआ है। व्यवस्था जो है, ना कहीं भी कटा नहीं है, खिड़की नहीं है। वैज्ञानिक बुद्वि ही खिड़की बनाता है, इसीलिए हवा निकल जाता है!
प्रश्न : प्रचलित वैज्ञानिक अवधारणा कहाँ पर fail हो रही है? शरीर के बारे में मानव के बारे में उसमें कहाँ-कहाँ कमजोरी है? जैसे DNA के बारे में।
उत्तर : ये बहुत ही विशाल भी, जटिल भी, ये प्रश्न है। यद्यपि इसके बारे में मेरे निष्कर्ष को मैं आपको बताता हूँ, मैं जो निष्कर्ष निकाला हूँ।
प्रश्न: हम जानना चारहे हैं की जो वैज्ञानिक अवधारणा है शरीर के बारे में, मानव के बारे में,उसमे कहाँ कमज़ोरी है ? जैसे की कहते हैं की डीएनए को लेकर बहुत हंगामा मचा हुआ है की डीएनए के द्वारा ही मानव के सारे के सारे गुण नियंत्रित होते हैं ?
उत्तर: जो आप सोचते हो उसमे हमारा कोई हस्तक्षेप नहीं है। किन्तु ऐसा होता नहीं, प्रमाणित नहीं होता, इतना ही सम्मान जनक उत्तर है उसका,पहला बात। ये कहाँ से ऐसे हो गया?
विज्ञान विधि में जितने भी ककंड़, पत्थर अभी तक मिला है, उसमें जीवन को पहचाना नहीं गया। ना पहचान सकते हो, जिस विधि से चल रहे हो, जीवन को आप पहचान ही नहीं सकते। क्योंकि आपको controlled effort