संकेतों को प्रसारित करना और ग्रहण करना प्रधान कार्य है। इस ढंग से जीवन के दो कार्य हैं - शरीर को जीवन्त रखना और ज्ञानवाही तंत्र को तंत्रित करना - ये दो कार्यक्रम हैं। जीवन ये दोनो कार्य को संपन्न किया रहता है, अच्छे स्वस्थ्य शरीर में और इसको सब व्यक्तियों में आप और हम निरीक्षण कर सकते हैं, परीक्षण कर सकते हैं, उस से तृप्त भी हो सकते हैं। इसका शुद्ध फल मिलता ही रहता है। ये कार्यक्रम से अपने को अच्छे ढंग से समझ में आता है।
प्रश्न : मेधस जो floating हैं, और ऊपर का जो skull है, इन दोनो के बीच में खाली स्थान रहता ही होगा?
उत्तर : इस तंत्र के पूरा रचना को ऐसे देखा जा सकता है, एक तो बताया मलाई जैसी लगती है पूरा मेधस तंत्र, तंत्र का मतलब इस प्रकार से बना हुआ है, जो रसो के संकेत को ग्रहण कर सकता है, इतना सूक्ष्म तंत्र। उसके बाद उसमें जो एक थक्का जमी हुई है, वो उसका पूरा एक तरफ की मूँछ ऊपर की झिल्ली से जुड़ी रहती है। मेंधस तंत्र के ऊपर एक झिल्ली होता है, नीचे एक झिल्ली होता है। ऊपर के भाग की जो झिल्ली है, वो झिल्ली से ये सारे मूँछ छुए रहते हैं। नीचे वाले मूँछ पानी में तैरता रहता है। जब कभी संकेत आता है, कम से कम दो मेधस सूत्र अपने कार्य को संपादित करता है। वो ऊपर की झिल्ली से जुड़ी हुई जो तंत्र है, उसको संकेत को प्रसारित करता है। उसके बाद पुनः एक जल का आवरण है, second floor। उसके बाद एक और झिल्ली है, दो झिल्ली के बाद skull। ये skull और झिल्ली के बीच में सामान्य space रहता है।
प्रश्न : सामान्य space का मतलब?
उत्तर : सामान्य space माने उस से जुड़ा नहीं रहता है, skull से। खाली स्थान सा रहता है, उस खाली स्थान में cough fibre दौड़ता रहता है, लोचदार बनाए रखने के लिए ये दौड़ता रहता है। इस ढंग से इसकी रचना, जिसको आप नाक में से निकालते हो, कई-कई बार। तो सबकी नाक से निकलती है। ये बना रहता है। खोपड़ी में जो हड्डी की रचना है, उसके नीचे cough, उसके नीचे एक झिल्ली, उसके नीचे एक रस का, एक बहुत अच्छी रासायन जल का व्यवस्था, उसके नीचे और एक झिल्ली, उसके नीचे ये मेधस तन्त्र, ऐसा बनी हुई है।
प्रश्न : मेधस से प्राण, साँस, हृदय, शरीर और शरीर से कार्य व्यवहार, इस पूरी chain को थोड़ा विस्तार पूर्वक समझाइये?
उत्तर : इसके बारे में जो अभी आपने बोला, मेधस तंत्र से साँस-वाँस की बात, माने ये क्रियावाही कार्य है - साँस लेना, दिल धड़कना, खून बहना - ये क्रियावाही कार्य है। ये कार्य के लिए मूल तत्व है हृदय। हुदय तंत्र से खून संचालित होता है। खून संचालित होने के आधार पर ही फेफडे़ की क्रिया स्पंदनशीलता बनता है। फेफड़े के क्रियाकलाप से हम सांस लेना, सांस छोड़ना बनता है।
प्रश्न : हृदय और मेधस कैसे जुड़े हुए हैं?