उत्तर : गति को हम यदि आवेश माने, हमारे अनुसार हम जो देखा हूँ, उसके अनुसार आवेशित गति, स्वभाव गति ये दोनों है। स्वभाव गति में आचरण निश्चित है। आवेशित गति में आचरण निश्चित नहीं है। कोई भी परमाणु, जीवन ही आवेशित होता है मान लो, और जीवन आवेशित होने पर जीवन का आचरण निश्चित नहीं है, क्या आचरण कर डालेगा। उसी भाँति यदि भौतिक परमाणुऐं यदि आवेशित रहते हैं, उनका निश्चित आचरण नहीं होना चाहिए।
प्रश्न : positive charge & negative charge - particle के रूप में देखते हैं वो परमाणुओं के अंशों को, उसका देखना आवश्यक नहीं है। charge के रूप में अध्ययन तो करते नहीं, अध्ययन हमेशा प्रभाव के रूप में करते हैं। प्रभाव को अंशों के आधार पर भी अच्छी तरह से explain किया जा सकता है।
उत्तर : प्रभाव जो है ना परमाणु के सभी ओर डली रहती है। प्रभाव क्षेत्र परमाणु के जो मात्रा रहती है, उससे बाहर में भी फैली रहती है, हर इकाई का प्रभाव। ठीक है। तो इन प्रभाव, जो फैला रहना स्वाभाविक बात है ये, इसमें तो स्वभाव गति विधि से आगे की विकास व आचरण की निश्चयता दोनों बना रहता है। विकास की संभावना, आचरण की निश्चयता, दोनों एक साथ बनी रहती है हर एक स्थिति में। इसी आधार पर अस्तित्व में अवस्थाएँ चार अवस्था में हो चुके हैं। इसका गवाही ये ही है। चारों अवस्था में यदि मूल में देखेंगे तो परमाणु ही है। मूल में यदि देखा जाए तो परमाणु ही है और दूसरा कोई चीज़ है ही नहीं है।
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प्रश्न : विज्ञान ने जब उसका अध्ययन करने गये तो अंशों को परमाणु से हटा के या कोई अंश को परमाणु में प्रवेश करा के, उसका जो प्रभाव पड़ता है, उसका अध्ययन किया है। उसके अध्ययन के आधार पर आवेश charge, positive या negative charge, चार अलग-अलग प्रकार के हैं ऐसा प्रतिपादित करने का प्रयास किया है।
उत्तर : वो ठीक किया होगा, वो भाग में हमारा कुछ कहना नहीं है। आवेश होता है तो आचरण निश्चित नहीं होगा। आचरण निश्चित होगा, यदि निश्चित मानते हैं आप, दस अंशों की परमाणु का आचरण निश्चित यदि मानते हैं, वो स्वभाव गति में ही होगा।
प्रश्न : विज्ञान के आधार पर जो charge explain करना चाहते हैं, ऐसा explain करना आवश्यक नहीं हैं। अंशों के आधार पर इन सारे, जो भी घटना घट रही है, प्रभाव, आचरण को explain किया जा सकता है, अंशों के आधार पर ही। charge को लाने की जरूरत नहीं।
उत्तर : देखो charge को आप लाना चाहते हैं। आप विदेशी शक्ति को impose किए बिना charge आपको पता लगेगा नहीं। आवेशित किए बिना आपको charge पता लगने वाला नहीं हैं। मनुष्य जब अँगुली किए बिना, मनुष्य हस्तक्षेप किए बिना, विकृत बनाए बिना परमाणुओं को नापना संभव नहीं है। परमाणुओं का गति, परमाणुओं का nature को explain करना इतना संभव नहीं है। उसको ऐसे ही माना जाए - ज्यादा सुखद, सुन्दर और शुभदायक हमको लगता है, जैसा है। क्या है? मूल में परमाणु है ये ज्ञान हो गया। विज्ञानियों को हो गया, अज्ञानियों