उत्तर : गठनशील परमाणु में अजीर्ण परमाणु में ज्यादा परमाणु अंश होते हैं, भूखे परमाणु में कम होते ही हैं। परमाणुओं के बड़ी विलक्षण[1] तरीके की इसका रचना भी है, तो एक ही प्रजाति की परमाणु, दो तीन प्रकार से प्रस्तुत हो जाते हैं, जैसा दो परिवेश में 200 अंश काम कर रहे हैं, मध्य में 200 से अधिक ही अंश हो जाते हैं। इस ढंग से 400 हो जाते हैं। वही चीज़ यदि तीन परिवेश में हो जाते हैं, चार परिवेश में हो जाते हैं, ये भी होते हैं, दो ही परिवेश में बहुत सारे परमाणु अंश भी होते हैं।
प्रश्न : परिवेश में अंशों की संख्या तो निश्चित है ना बाबाजी - 2, 8, 18, 32?
उत्तर : वो तो दूसरी बात है वो, तृप्त परमाणु की बात है वो। वो कहाँ से लाओगे, सब जगह में वो कहाँ से आने वाला है? गठनशील में दो परिवेश भी होता है, चार परिवेश भी होता है, छः परिवेश भी होता है।
प्रश्न : परिवेश में अंशों की संख्या निश्चित नहीं हैं?
उत्तर : उसमें घटता बढ़ता रहता है ये निश्चित है, इसलिए जब कार्य करते समय में निश्चित संख्या में ही रहते हैं, उसका आचरण निश्चित होने के अर्थ बनता है। इसका मतलब है, निश्चित आचरण करता रहता है, वो बदलता नहीं है, ऐसा बात नहीं है। वो बदल जाता है तो दूसरा प्रजाति होता है, वो आचरण ही वो करेगा। ये भी निश्चित है।
प्रश्न : विज्ञान के अवधारणा के अनुसार तो जो orbits हैं, इनमें अंशों की maximum संख्या निश्चित है, 2, 8, 18, 32 क्रम से, जैसे बाबाजी ने कहा की दूसरे, तीसरे परिवेश में अंशों की संख्या 200 भी हो सकती है?
उत्तर : जो परिवेशों में, दो परिवेश का भी परमाणु हो सकता है, चार परिवेश का भी हो सकता है, पाँच का भी हो सकता है, छः का भी हो सकता है - ये बताया। ये ठीक है? इसमें एक परिवेशों में 200 अंश भी हो सकते हैं, उससे ज्यादा भी हो सकते हैं। ये जितने भी अंश परिवेशों में काम करते हैं, उतने ही अंश या उससे अधिक अंश मध्य में हो जाते हैं, उससे कम नहीं होते हैं।
प्रश्न : प्रथम परिवेश में अधिकतम संख्या दो हो सकती है, विज्ञान के अनुसार, दूसरे में 8, 18, 32?
उत्तर : ऐसा कुछ नहीं हैं, प्रथम परिवेश में जो तृप्त परमाणु जो होता है, या तृप्त परमाणु भले ना हो, जो अतृप्त रहा हो, ऐसा भी हो सकता है उसमें, तृप्त परमाणु में मध्य में एक ही अंश होता है। वो जीवन परमाणु होता है। मध्य में यदि परिवेश के समान यदि अंश हो जाते हैं, तब वो जीवन परमाणु नहीं होता है, भौतिक परमाणु ही होता है। अच्छा ऐसे परमाणु में भी, हो सकता है ऐसा कोई प्रजाति, यदि दो ही अंश पहले परिवेश में होना है, तब तो उसमें मध्य में एक ही होना आवश्यक बनता है।
विलक्षण: लक्षणरहित, अनियमित, अनिश्चित, अनोखा, विचित्र; singular, eccentric ↑