लिए, वो घटित हो जाता है। तो ये दोनों कामना घटित होने वाली कामनाएँ हो जाते हैं। इस ढंग से घटित माना जाता है।
प्रश्न : महाराज जी मैँ एक मनुष्य के लिये कामना करता हूँ कि ये मनुष्य बहुत अच्छा हो जाए, वो अच्छा हो जाता है ये ठीक समझ में आता है। मैं एक पत्थर के लिए सोचता हूँ कि ये पत्थर उठ के वहाँ चल के बैठ जाए या वो पत्थर लुढ़क के गिरने वाला है, वो रुक जाए तो क्या कामना पत्थर को रोक सकता है, मनुष्य पर तो प्रभाव डाल सकता है।
उत्तर : अरे बेकार बात ये सब, कामना, कामना ही है बाबा। जो पत्थर गिरना है वहाँ, जहाँ गिरना है वहीं गिरता है। तो हमारा कामना के अनुरूप हमारा सिर पर नहीं गिरा, इसीलिए हमारा कामना सफल हो गया हम सोचते हैं। यही बात है और दूसरा कुछ बात नहीं है। तो हम आपको ये विदित करना चाहे हैं सच्चाई यही है - हमारा सद्कामना, दुष्कामनाएँ घटित होने वाले के स्वरुप में हो जाता है, यदि वो घटित हो जाता है, हम सोचते हैं कि हमारा कामना था इसीलिए हो गया। ऐसा माना जाता है। होता हमारा कामना से कुछ नहीं है। कर्म से होता है, कार्य से होता है।पहले घाट कहाँ पहुँचा है? कामना और कार्य में अंतर आपको समझ में आता है?
प्रश्न : एक मिनट बाबा, ये मैंने जैसे प्रयास शब्द उपयोग किया, तो वो जो सामूहिक जप करते हैं कोई दुर्घटना से बचें, आपने कहा वो कामना है, तो कामना और प्रयास के बीच परिभाषित कर दीजिए।
उत्तर : कामना और कार्य! कार्य शब्द। कार्य क्या है? भाई कोई एक, अभी आप ही ने बताया था, satellite गिर रहा है। उस समय में जितने भी जो कई missiles को तैनात किया। तैनात करके उसको जो जिस directions में आता रहा, उसको बदलने के लिए Russia भी प्रयत्न किया और America भी प्रयत्न किया। उसमें दोनों sincere attempt किया एक साथ, एक मन से। उसको वो सफल हुआ मानते हैं। इसको हम कहते हैं कार्य। ठीक है? तो हम बैठ करके, ये जो गिर रहा है हमारा सर पर ना गिरे और हमारा देश पर ना गिरे और दूसरे मनुष्य के ऊपर ना गिरे, ये सब एक के साथ एक extend किया, वो हम बैठ करके कामना कर रहे हैं। वो जो गिरने वाला था, उसी जगह में ही गिरा, जिस कार्य की संयोग से, स्वयं की गति की संयोग से जहाँ गिरना था वहाँ गिर गया। उसके साथ हमारा शुभकामना भी फलित हो गई, उनका कार्य भी फलित हो गया, इसमें क्या तकलीफ है?
प्रश्न : हम लोगों ने जप किया कई लाख आदमियों ने, और हम लोगों ने ऐसा माना कि हम लोगों के जप के फलस्वरूप किसी मानव विनाश से बच गये, समुद्र मे जा के गिर गया। ऐसा हम लोगों ने माना, तो वो हमारा भ्रम था कि वास्तव में उसमें कोई सच्चाई थी?
उत्तर : वो भ्रम है, उसको यदि पूछोगे तो, ऐसा पूछोगे तो उसका उत्तर वही है।तो ये सही है हमारा शुभकामना करना हमारा फर्ज़ थी, हमने किया, हमसे जितना बन सकता है शुभकामना की समय दिया, वो हमारा शुभ का एक परिचायक है।
प्रश्न : मंत्र जप और अनुष्ठान को आप कर्म नहीं मानेंगे?