जैसा - अभी आप Skylab की बात किए हो। मानव ने आकाश में रखा था। ठीक है, उसका जो है ना क्रम क्या है? वो होना था कब, क्या होना था क्या हो गया? वो आपको एक थोड़ा सा सूचना के रूप में बताना चाहते हैं। आकाश में अभी बहुत सारे satellite मनुष्य की control से बाहर हो चुका है। ये हो चूका है। इसका दो ही विधि है। जैसा Skylab गिरा, वैसा ही गिरे। वो अपना गति को किसी ना किसी direction change होने के पश्चात कोई ना कोई धरती में जा करके गिरेगा ही। जैसा अभी एक धूमकेतु[1] जा करके बृहस्पति में विलय हो गया। तो उसी विधि से ये जो जितने भी मनुष्य के control से बाहर हो गई है, उसका दो परिणाम है यथावत जा कर के कोई जगह में गिरे, या नहीं, वो धूलि के स्वरूप में हो जाए। धूलि के स्वरूप में होने के लिए समय ज्यादा लगता है। ज्यादा लगने के क्रम में वो धूलि होने के बाद भी वो गति यथावत बना रहता है। जब कभी वो दिशा परिवर्तन होगा (वो किस आधार पर) - ग्रह गोलों के पास आना, दूर होने के आधार पर दिशा परिवर्तन होगी। उसके आधार पर दिशा परिवर्तन होने के बाद घूमते घूमते घूमते किसी ना किसी धरती में विलय हो जाता है - धूलि के रूप होने के बाद। अभी जो धूमकेतु ब्रहस्पति में विलय हुआ वो धूलि के रूप में ही था। ये होता क्यों है? आकाश में जितने भी छोड़े हो, ये सब ऐसे धूलि के स्वरूप में परिणत होना ही है। उसका एक सिद्धांत है, फटिक सिद्धांत। क्या फटिक सिद्धांत क्या होता है भाई? तो वस्तु शून्य में अवस्थित होने के बाद अपने गति के अनुसार घूमता रहता है। नहीं तो उनको विकसित होना है, नहीं तो ह्रास होना है। दो में से एक ही गति है। तो विकसित होने के लिए उनके पास सामग्री नहीं है। उस स्थिति में धूलि हो जाता है। इसका नाम है फटिक।
हरि हर, जय हो, मंगल हो, कल्याण हो।
प्रश्न : ये जो ज्योतिष संबंधित बहुत सारी चर्चा हुई उसमें ऐसा लगा है की घटनाएं पहले से मनुष्य के साथ निश्चित हैं, जैसे अभी परंपरा में बोला भी जाता है, कि आपके साथ जो घटना होना है पहले से तय है, आप उसमें कुछ नहीं कर सकते। क्या ये बात सही है?
उत्तर : गलत! मनुष्य की प्रवृत्ति के अनुसार घटनाएँ परिवर्तित हो जाती हैं, मनुष्य से घटित करने वाली जितने भी घटनाएँ है। ठीक है, ये समझ में आता है कि नहीं आता है? मनुष्य के प्रवृत्ति के अनुसार मनुष्य घटित करने वाली क्रियाएँ बदलते जाते हैं। ये समझ में नहीं आता है? होता है? ठीक हो गया। तो ये मनुष्य की घटना क्रम में बताया। मनुष्य घटित करना चाहता है जितनी भी वो उसके बारे में ये हो गया आधार। मनुष्य का प्रवृत्तियों के आधार पर घटनाओं को design करना, घटित कराना बनता है। इसको करते ही आया है। आदमी जात करते ही आया है कि नहीं करते आया है आपके अनुसार?
प्रश्न : जैसे मृत्यु है, शरीर का छूटना?
उत्तर : मनुष्य जो घटित कराता है कह रहे हैं, पुनः वो ही बात! घटित कराने के लिए जितने भी design बनाता है, घटित कराते आया है कि नहीं आया है? आप जो घटित कराने के लिए जो design बनाया, जो घटित करा पाया, आप ही घटित कराये कि नहीं कराये? [कराए] बस इतने से मतलब ही है, और काहे के लिए इतना पुराण-पंचांग?
धूमकेतु / comet : सौरमण्डलीय निकाय जो पत्थर, धुल, बर्फ & गैस से बने हुए छोटे-छोटे खण्ड ↑