7. साथी-सहयोगी के प्रति विश्वास निर्वाह निरंतरता (व्यवस्था तंत्र में) = स्नेह, सौजन्यता, निष्ठापूर्वक वस्तु व सेवा प्रदान के रूप में है।
8. सहयोगी-साथी के प्रति विश्वास निर्वाह निरंतरता (व्यवस्था तंत्र में) = गौरव, सम्मान, कृतज्ञता, सौहार्द्रता, सौम्यता, सरलता, भावपूर्वक सेवा समर्पण के रूप में है।
9. सख्यता (मित्र) की परस्परता में विश्वास निर्वाह निरंतरता = स्नेह, प्रेम, सम्मान, निष्ठा, अनन्यता, सौहार्द्रता भावपूर्वक वस्तु व सेवा समर्पण के रूप में है।
10. व्यवस्था के प्रति भागीदारी का विश्वास निर्वाह निरंतरता = मानवीयतापूर्ण आचरण, व्यवहार, उत्पादनपूर्वक आवश्यकता से अधिक उत्पादन।
11. भागीदारी के प्रति व्यवस्था विश्वास निर्वाह निरंतरता = न्याय सम्मत अभयतापूर्ण जीवन के कार्यक्रम के लिए शिक्षा को सर्वसुलभता न्याय सम्मत आचरण तथा व्यक्तित्व के संरक्षण, संवर्धन, प्रोत्साहन सहित असंदिग्ध न्यायिक व्यवस्था के रूप में है।
12. व्यवस्था व्यवस्थिति की सहज परस्परता में विश्वास निर्वाह निरंतरता = स्थायी मूल्यों में आधारित विधि, शिष्ट मूल्यों में आधारित नीति, उत्पादन मूल्यों में आधारित व्यवस्था पूर्वक सिद्ध न्याय व समाधान सर्व सुलभता के रूप में है।
13. व्यवस्था एवं संस्कृति की परस्परता में विश्वास निर्वाह = न्याय संगत प्रक्रिया में आश्वासन विश्वसन पूर्वक न्यायानुगमन कार्यक्रम सहित व्यक्तित्व के प्रस्थापन के रूप में है।
14. सभ्यता एवं संस्कृति की परस्परता में विश्वास निर्वाह निरंतरता = नौ स्थापित मूल्य में नौ शिष्ट मूल्य, नौ शिष्ट मूल्य में दो उत्पादन मूल्य का अर्पण समर्पण समावेश के रूप में है।
15. सभ्यता विधि की परस्परता में विश्वास निर्वाह निरंतरता = प्रबुद्धता, संप्रभुता के रूप में है।
16. सहयोगी-साथी के प्रति विश्वास निर्वाह निरंतरता (अभ्यास विधि में) - श्रद्धा, गौरव, कृतज्ञता, अनन्यता, पूज्यता, सरलता, सौजन्यता एवं सेवा सहित स्व-समर्पण के रूप में है।