17. साथी-सहयोगी के प्रति विश्वास निर्वाह निरंतरता (अभ्यास विधि में) - दायित्व सहित अर्थात् समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी सहित स्नेह, वात्सल्य, ममता, सहजता, सौजन्यता सहित वस्तु समर्पण और संवेदनशील और संज्ञानशील विधि से अर्पण समर्पण सहयोग भाव का निर्वाह करेगा।
स्थापित नौ मूल्यों में, से, के लिये विश्वास साम्य मूल्य है, जिसके बिना कोई ऐसा संबंध नहीं है जो स्वस्थ हो।
प्रेमपूर्ण मूल्य है। प्रेम अन्य आठों मूल्यों के रूप में प्रकारान्तर से है, क्योंकि प्रत्येक स्थापित मूल्य प्रेम से संबंधित है, जो अनुभव पूर्वक सिद्ध है। यही प्रमाण है।
“सत्य ही प्रेम, प्रेम ही पूर्ण, पूर्ण ही अनुभव, अनुभव ही सत्य है। इसलिए पूर्ण मूल्य में स्थापित मूल्य, स्थापित मूल्य में शिष्ट मूल्य एवं शिष्ट मूल्य में उत्पादन मूल्य समर्पित है।”
गुरु मूल्य में लघु मूल्य समाया हुआ है। इसलिये जागृति विकास के क्रम में गुणात्मक प्रगति है। इसी क्रम में चैतन्य प्रकृति है। इसके गुणात्मक परिर्वतन के फलस्वरूप ही निर्भ्रमावस्था भी प्रसिद्ध है। यही निर्भ्रम अवस्था पूर्ण मूल्यानुभूति योग्य क्षमता है, इसलिये गुणात्मक परिर्वतन के लिये चैतन्य प्रकृति प्रवृत्त है।
भौतिक वस्तुओं के उत्पादन के दो मूल्य हैं :-
1. उपयोगिता मूल्य।
2. सुंदरता मूल्य (कला मूल्य)।
इन दोनों मूल्यों को आकाँक्षा द्वय की सीमा में प्रयुक्तियाँ है।
प्रकारान्तर से संबंधों की स्थिति निम्नानुसार दृष्टव्य है :-
1. माता-पिता - जन्म दाता, प्राण दाता, जीवन दाता एवं विद्या दाता।
2. भाई-बहन - जन्म सिद्ध, व्यवहार सिद्ध।
3. पति-पत्नी - कामुकतावश अमानवीयता तथा मर्यादावश मानवीयता पूर्ण विधि से यतित्व व सतित्व।
4. गुरु - कुशलता, निपुणता, पाण्डित्य (विद्या)।